- घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम आयात पर निर्भरता कम करेगा.
टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, चिप्स की जरूरत भी उतनी ही बढ़ रही है. भारत ने पिछले पांच साल में सेमीकंडक्टर सेक्टर में अपनी मौजूदगी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं. जहां 2021 में देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा कमर्शियल बेस नहीं था, वहीं अब चिप मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग और डिजाइन से जुड़े कई प्रोजेक्ट आगे बढ़ चुके हैं. अब सरकार इस पूरे इकोसिस्टम को अगले स्तर पर ले जाने के लिए Semicon 2.0 पर फोकस कर रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में Semicon India 2026 का उद्घाटन किया. 17 से 19 सितंबर तक चल रहे इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की थीम Silicon to Systems: Building the Ecosystem है. इसमें 52 देशों की 600 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. कार्यक्रम में ग्लोबल और भारतीय कंपनियों के साथ निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप और नीति-निर्माता शामिल हुए हैं.
2021 में शुरू हुआ था भारत का पहला चिप मिशन
दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ Semicon 1.0 को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम तैयार करना था. इसके तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव हैं. इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-LED डिस्प्ले फैब और नौ ATMP-OSAT यूनिट्स शामिल हैं. इनमें से पांच यूनिट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. साथ ही, चिप डिजाइन से जुड़ी 24 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और देशभर के 500 संगठनों के एक लाख से ज्यादा इंजीनियरों को एडवांस्ड चिप-डिजाइन टूल्स तक पहुंच दी गई है.
Semicon 2.0 में डिजाइन से लेकर टेक चेन पर फोकस
15 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ Semicon 2.0 को मंजूरी दी. इस बार फोकस सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां लगाने पर नहीं है. योजना में चिप डिजाइन, मशीनरी और मैटेरियल, नए फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट को शामिल किया गया है. इसका एक बड़ा फोकस फैबलेस कंपनियों पर भी है. ऐसी कंपनियां चिप का डिजाइन तैयार करती हैं, लेकिन चिप की फिजिकल मैन्युफैक्चरिंग किसी दूसरी कंपनी से कराती हैं. इसके जरिए भारत में अपनी चिप डिजाइन तैयार करने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.
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सेमीकंडक्टर क्यों जरूरी हैं?
सेमीकंडक्टर आज स्मार्टफोन और कंप्यूटर से लेकर AI, 5G-6G, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक तक में इस्तेमाल होते हैं. भारत में सेमीकंडक्टर की मांग वित्त वर्ष 2030 तक 110 अरब डॉलर और 2035 तक 200 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है. भारत ने वित्त वर्ष 2017 से 2025 के बीच सेमीकंडक्टर उत्पादों के आयात पर करीब 150 अरब डॉलर खर्च किए हैं. ऐसे में घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी माना जा रहा है.
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