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Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव में चढ़ा सियासी पारा, केंद्र में महिलाओं से जुड़ा राजनीतिक मुद्दा; गोगोई ने बीजेपी पर साधा निशाना

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असम में चुनावी घोषणा के बाद से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य में राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन और समीकरण बनाने की कवायद तेज हो गई है. साथ ही इस चुनाव में महिलाओं से जुड़ा मुद्दा राजनीति का केंद्र बन गया है. वहीं, नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि वामपंथ की विचारधारा से जुड़े दलों ने समय- समय पर अलग क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के साथ गठबंधन किया है. कई मौके पर बीजेपी के साथ भी इनका तालमेल देखने को मिला है. ऐसे में जातीय परिषद जैसे क्षेत्रीय दल से समझौते को लेकर कवायद भी तेज हो गई है. यह इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते है.

गौरव गोगोई ने महिलाओं के मुद्दे पर दिया बड़ा बयान

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने महिलाओं के मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया है. उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को किसी भी प्रकार की राजनीतिक शर्तों में नहीं बांधा जाएगा. उन्होंने कहा है कि महिलाओं को न किसी दल का सदस्य बनना होग और न ही किसी पार्टी का झंडा उठाना होगा. साथ ही किसी भी रजिस्टर पर साइन नहीं करना पड़ेगा. इसके अलावा कहा है कि न ही किसी राजनीतिक विचारधारा को सुनने के लिए मजबूर किया जाएगा. योग्य महिलाओं को उनके अधिकार सीधे और पूरी तरह से बिना शर्त पर दिए जाएंगे. 

गोगोई ने CM हिमंता पर साधा निशाना

गौरव गोगोई ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बीजेपी सरकार में महिलाओं को आर्थिक सहायता पाने के लिए कई शर्तों को सामना करना पड़ेगा. महिलाओं को बीजेपी की बैठक में शामिल होना पड़ता है. पार्टी का झंडा लगाना पड़ता है. रजिस्टर में साइन करने पड़ते हैं. राजनीतिक गतिविधियों में एक्टिव भूमिका निभाना पड़ती है. इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि अगर कोई महिला इन शर्तों को पूरा नहीं करती, तो उन्हें लाभार्थियों की सूची में से हटा दिया जाता है. उसे किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जाती है.

महिलाओं को सीधे बैंक खातों में पहुंचाई जाएगी आर्थिक सहायता 

विपक्षी नेता ने घोषणा कि उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाएगी. यह पूरी तरह बिना शर्त के होगी. उन्होंने इसे अपनी सरकार की गारंटी करार दिया है. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि असम में वास्तव में भाजपा का अस्तित्व नहीं है. यहां दो तरह की कांग्रेस है, एक जो तरुण गोगोई के सिद्धांतों का पालन करती है, तो दूसरी जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बनी है.

राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल दलों की ताकत पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि गठबंधन, रणनीति और जनता का विश्वास, विशेषकर महिलाओं का समर्थन में निर्णायक भूमिका निभाएगा. असम का यह चुनावी मुकाबला इसलिए और भी दिलचस्प हो गया है. इसमें सामाजिक मुद्दों के अलावा राजनीतिक समीकरण भी बराबर का प्रभाव डाल रहे हैं. 

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