Home Business एक सेकंड में 5KM, परमाणु बम गिराने में सक्षम… कितनी खतरनाक है...

एक सेकंड में 5KM, परमाणु बम गिराने में सक्षम… कितनी खतरनाक है Agni-3 मिसाइल, जिसका हुआ सफल परीक्षण?

0

<p style="text-align: justify;">भारत ने इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल &lsquo;अग्नि-3&rsquo; का 06 फरवरी, 2026 को ओडिशा के <a title="चांदी" href="https://www.abplive.com/silver-prices" data-type="interlinkingkeywords">चांदी</a>पुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. इस लॉन्च ने सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर को सही साबित किया. यह परीक्षण स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में किया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के सभी तकनीकी व ऑपरेशनल पैरामीटर सफल रहे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अग्नि मिसाइल सिस्टम भारतीय रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है. यह लॉन्च स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में हुआ, जो भारत की महत्वपूर्ण सैन्य ताकत का जिम्मा संभालती है. इस परीक्षण से साफ है कि भारत की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता पूरी तरह मजबूत और भरोसेमंद है. अग्नि-3 एक इंटरमीडिएट-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. इसमें एक साथ कई टारगेट को निशाना बनाने वाली MIRV जैसी ही समान टेक्नोलॉजी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत की रेंज में होगा पूरा पाकिस्तान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अग्नि-3 मिसाइल की बड़ी खसियत इसकी स्पीड (Speed) है. इसकी रेंज 3 से 5 हजार किलोमीटर बताई जा रही है. चूंकि इस मिसाइल का वजन कम है, जिस वजह से इसकी रेंज को और बढ़ाया जा सकता है. इसे पाकिस्तान और पूरा और चीन का अधिकांश हिस्सा भारत की रेंज में होगा. इसकी स्पीड मैक 15 (18,522 किलोमीटर प्रतिघंटा) है, यानी 5 से 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड, जो भारत के दुश्मन को पलक झपकाने तक का मौका नहीं देगी. इसकी लंबाई 17 मीटर और वजन 50 हजार किलो है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अग्नि-3 मिसाइल में खास क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत की अग्नि-3 मिसाइल में रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा है, जिसकी खासियत ये है कि मिसाइल उड़ते समय बीच में ही टारगेट बदल सकती है. इसी बीच भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए भी एक अहम कदम उठाया है. सेना ने 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार की खरीद के लिए करीब 725 करोड़ रुपये की टेंडर जारी की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करेगा भारत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है, ताकि सिस्टम जल्दी से सेना में शामिल हो सकें. ये रडार खास तौर पर ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और छोटे-धीमे लक्ष्यों को पकड़ने में बेहद कारगर होंगे. आज के समय में ड्रोन से होने वाले खतरों को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है. इन रडारों से सीमाओं पर निगरानी और एयर डिफेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत होगा.</p>

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version