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ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट करने वाले प्रोफेसर महमूदाबाद पर नहीं चलेगा केस? SC ने हरियाणा सरकार से कहा- नरम रुख दिखाओ

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अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नरमी बरतने का सुझाव दिया है. अली खान महमूदाबाद ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसे लेकर उन पर आरोप है कि उन्होंने देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डाला.

मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने अभी तक इस मामले में केस चलाने की मंजूरी नहीं दी है. हरियाणा सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कोर्ट ने पूछा की मामले में चार्जशीट कब दाखिल की गई.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार एएसजी राजू ने बताया कि चार्जशीट 22 अगस्त, 2025 को दाखिल की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अभी भी लंबित है. इस पर बेंच ने कहा कि सरकार प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी न देकर बड़प्पन दिखाए. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर मामला बंद होता है कि अली खान महमूदाबाद से भी भविष्य में जिम्मेदारी से पेश आने की उम्मीद की जाती है.

एएसजी एसवी राजू ने हरियाणा सरकार से यह पूछने के लिए और समय मांगा कि क्या वह उदारता दिखाते हुए अपनी मंजूरी नहीं देगी और मामले को खत्म कर देगी. सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी राजू को निर्देश लेने की अनुमति दी और मामले की सुनवाई छह हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी.

हरियाणा पुलिस ने अली खान महमूदाबाद के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज होने के बाद उन्हें पिछले साल 18 मई को गिरफ्तार कर लिया था. 21 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. आरोप है कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करके देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डाला.

 

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