Saturday, November 7, 2026
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Satellite Network: बिना सिम और मोबाइल टावर के भी चलेंगे स्मार्टफोन, जानें कैसे होगी कॉलिंग?

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  • भारतीय TRAI ने सैटेलाइट संचार का प्रस्ताव पेश किया।
  • स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़कर दूरदराज में काम करेंगे।
  • टेलिकॉम कंपनियाँ सैटेलाइट प्रदाताओं का इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल करेंगी।
  • सेवा शुरू होने के लिए सरकारी मंजूरी अभी बाकी है।

Satellite Network: जब आप किसी पहाड़ी इलाके या किसी रिमोट एरिया में घूमने जाते हैं. तो आपके फोन में से नेटवर्क की सारी डंडिया गायब हो जाती है.आसपास कोई मोबाइल टावर न होने की वजह से इमरजेंसी कॉल करना और इंटरनेट चलाना बिल्कुल नामुमकिन हो जाता है. लेकिन आने वाले दिनों में आपको ऐसी जगहों पर यह परेशानी नहीं होती दिखेगी. क्योंकि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI ने देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को लेकर एक बेहद शानदार प्रस्ताव पेश किया है.  

TRAI की इस नई पहल के जरिए आपका स्मार्टफोन को बिना किसी जमीनी मोबाइल टावर के सीधे आसमान में घूम रहे सैटेलाइट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है. हालांकि अभी यह सुविधा आम लोगों के लिए शुरू नहीं हुई है.  लेकिन इसके आने से कॉलिंग और इंटरनेट की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी. चलिए आपको बताते हैं कि यह नई तकनीक कैसे काम करेगी.

बिना सिम और मोबाइल टावर होगी कॉलिंग 

ट्राई ने 5 नवंबर 2026 को सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन नाम से एक नया फ्रेमवर्क बनाने की सिफारिश की है. इस नए नियम का मकसद अंतरिक्ष में सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने वाली कंपनियों और जमीन पर ग्राहकों को मोबाइल सेवाएं देने वाली टेलीकॉम कंपनियों के बीच तालमेल को आसान बनाना है. TRAI ने इस सैटेलाइट नेटवर्क ऑथराइजेशन की समय सीमा 20 साल रखने का सुझाव दिया है. इस प्रस्ताव में सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क एज ए सर्विस यानी SCNaaS मॉडल को अपनाने की बात कही गई है. 

इसका मतलब यह है कि एयरटेल और जियो जैसी टेलीकॉम कंपनियों को अपने ग्राहकों को सैटेलाइट नेटवर्क देने के लिए खुद का पूरा सैटेलाइट सिस्टम लॉन्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह टेलीकॉम कंपनियां किसी भी सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर कंपनी के साथ हाथ मिलाकर उसका इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल कर सकेंगी. हालांकि सैटेलाइट नेटवर्क वाली कंपनियां सीधे आम ग्राहकों को अपना प्लान नहीं बेच पाएंगी इसके लिए उन्हें अलग से सर्विस परमिशन लेनी होगी.

Satellite Network: बिना सिम और मोबाइल टावर के भी चलेंगे स्मार्टफोन, जानें कैसे होगी कॉलिंग?

डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक से जुड़ेंगे स्मार्टफोन

TRAI के इस पूरे प्रस्ताव में सबसे कमाल की चीज डायरेक्ट-टू-डिवाइस यानी D2D कनेक्टिविटी है. अभी तक फोन कॉल और इंटरनेट के लिए घर और दफ्तर के पास लगे टेलीकॉम टावर से सिग्नल पकड़ते हैं. अगर टावर खराब हो जाए और आप कवरेज एरिया से बाहर चले जाएं तो फोन का नेटवर्क तुरंत गायब हो जाता है. लेकिन इस नई डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक में इस तकनीक को सपोर्ट करने वाले स्मार्टफोन बिना किसी बीच के टावर के सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएंगे. 

इसक फायदा उन इलाकों में देखने को मिलेगा जहां आज भी मोबाइल टावर लगाना बहुत मुश्किल काम है. ऊंचे पहाड़, घने जंगल, रेगिस्तान और बॉर्डर के पास बसे दूरदराज के गांवों में जहां आज तक नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है वहां भी लोग फोन से आसानी से बात कर सकेंगे. किसी प्राकृतिक आपदा के समय जब जमीन के सारे टावर टूट जाते हैं. तब भी यह तकनीक लोगों की जान बचाने में काफी मददगार साबित होगी.

Satellite Network: बिना सिम और मोबाइल टावर के भी चलेंगे स्मार्टफोन, जानें कैसे होगी कॉलिंग?

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आम मोबाइल यूजर्स को कब से मिलेगा यह फायदा?

अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर हमारे फोन में यह सैटेलाइट नेटवर्क कब से दिखना शुरू होगा और इसके लिए कितने पैसे खर्च करने पड़ेंगे. फिलहाल ट्राई ने अपनी तरफ से यह सिफारिशें तैयार करके केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग यानी DoT के पास भेज दी हैं. अब इस पूरे मामले पर आखिरी मुहर सरकार को लगानी है. सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्पेक्ट्रम का बंटवारा होगा और नियम तय किए जाएंगे. जिसके बाद कंपनियां अपनी सर्विस शुरू करेंगी. 

TRAI ने अभी तक इस सर्विस  शुरू होने की कोई तारीख, रिचार्ज प्लान की कीमत और मिलने वाली इंटरनेट स्पीड के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. अभी यह भी साफ होना बाकी है कि शुरुआत में यूजर्स को सिर्फ इमरजेंसी मैसेज और कॉलिंग की सुविधा मिलेगी, या फिर वे हाई-स्पीड इंटरनेट भी चला सकेंगे. 

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