- Apple ने 2018 में इसे विकसित किया, प्रीमियम डिवाइसों में प्रयुक्त है.
स्मार्टफोन की स्क्रीन अब सिर्फ बड़ी और चमकदार होने तक सीमित नहीं रही है. आज फोन खरीदते समय AMOLED, OLED और pOLED जैसे डिस्प्ले नाम आम हो चुके हैं. इसी के साथ प्रीमियम स्मार्टफोन में LTPO का नाम भी तेजी से सुनने को मिलता है. खासकर जब किसी फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट या Always-On Display की बात होती है, तब LTPO को भी खास फीचर के तौर पर बताया जाता है, लेकिन LTPO खुद कोई अलग तरह का स्क्रीन पैनल नहीं है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो डिस्प्ले को जरूरत के हिसाब से उसका रिफ्रेश रेट बदलने में मदद करती है. तो आइए जानते हैं कि LTPO Display काम कैसे करती है.
LTPO Display क्या है?
LTPO का पूरा नाम Low-Temperature Polycrystalline Oxide है. यह एक डिस्प्ले बैकप्लेन टेक्नोलॉजी है, जिसमें दो तरह के Thin-Film Transistors यानी TFTs का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें Low-Temperature Polycrystalline Silicon यानी LTPS और Oxide TFTs शामिल हैं, जो आमतौर पर IGZO यानी Indium Gallium Zinc Oxide पर आधारित होते हैं.
LTPO Display काम कैसे करती है
LTPO में स्विचिंग सर्किट के लिए LTPS का इस्तेमाल होता है, जबकि डिस्प्ले को चलाने के लिए Oxide TFTs काम करते हैं. इन दोनों को मिलाकर बनाई गई यह व्यवस्था डिस्प्ले को तेज काम करने के साथ कम पावर इस्तेमाल करने में मदद करती है. LTPO, OLED या AMOLED का ऑप्शन नहीं है. बल्कि यह इन स्क्रीन के नीचे काम करने वाली टेक्नोलॉजी है, जो पिक्सल को कंट्रोल करती है. इसी वजह से किसी फोन के स्पेसिफिकेशन में LTPO AMOLED Display लिखा दिखाई दे सकता है.
LTPO को पहली बार कब इस्तेमाल किया गया?
LTPO टेक्नोलॉजी को Apple ने 2018 में Apple Watch Series 4 के लिए LTPO बैकप्लेन के तौर पर विकसित किया था. इसके बाद यह टेक्नोलॉजी धीरे-धीरे प्रीमियम स्मार्टफोन और स्मार्ट वॉच में ज्यादा इस्तेमाल होने लगी.
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LTPO Display में क्या खास है?
LTPO का सबसे बड़ा फायदा पावर की बचत है. ज्यादा रिफ्रेश रेट पर चलने वाली स्क्रीन ज्यादा पावर खर्च करती है, जबकि हर तरह के कंटेंट के लिए हाई रिफ्रेश रेट की जरूरत नहीं होती है. LTPO इसी जरूरत के हिसाब से रिफ्रेश रेट को कम या ज्यादा कर सकता है. जैसे अगर आप ई-बुक पढ़ रहे हैं या स्क्रीन पर कोई स्थिर तस्वीर देख रहे हैं, तो डिस्प्ले बहुत कम रिफ्रेश रेट पर चल सकता है. वहीं स्क्रॉलिंग शुरू करने पर यह रिफ्रेश रेट बढ़ा देता है, जिससे स्क्रीन पर मूवमेंट ज्यादा स्मूद दिखाई देता है. इस तरह यूजर को हाई रिफ्रेश रेट और बेहतर पावर एफिशिएंसी में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं पड़ती है.
LTPO Display में क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
LTPO की मैन्युफैक्चरिंग सामान्य OLED डिस्प्ले की तुलना में ज्यादा मुश्किल होती है. यही वजह है कि यह टेक्नोलॉजी आमतौर पर हाई-एंड स्मार्टफोन और स्मार्ट वॉच में देखने को मिलती है. इसके अलावा कुछ मामलों में डिस्प्ले डेंसिटी को लेकर भी समझौता करना पड़ सकता है, हालांकि ऐसा कम ही देखने को मिलता है. LTPO में बड़े IGZO TFTs के इस्तेमाल से कुछ स्थितियों में डिस्प्ले डेंसिटी प्रभावित हो सकती है.
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