फोन पर आने वाली हर कॉल अब भरोसे लायक नहीं रह गई है. साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खाते खाली कर रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई कॉल्स ऐसे नंबरों से आती हैं, जिन्हें पहचानकर आप शुरुआत में ही सतर्क हो सकते हैं. आइए जानते हैं कि किन नंबरों या कोड से आई कॉल पर आपको खास सावधानी बरतनी चाहिए.
विदेशी कोड वाले नंबरों से आने वाली कॉल
पिछले कुछ समय से +92, +84, +62 और +60 जैसे अंतरराष्ट्रीय कोड से आने वाली कॉल्स और व्हाट्सऐप कॉल्स को लेकर लगातार चेतावनी दी जा रही है. +92 पाकिस्तान का कंट्री कोड है, जबकि +84, +62 और +60 क्रमशः वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया के कोड माने जाते हैं. इन नंबरों से आने वाली कॉल्स में स्कैमर्स फ्री गिफ्ट, लॉटरी जीतने या किसी अनजान स्कीम का लालच देकर बातचीत शुरू करते हैं. हालांकि जरूरी नहीं कि ये कॉल्स सच में उन्हीं देशों से आ रही हों, क्योंकि वर्चुअल नंबरों के जरिए भी ऐसी कॉल्स जनरेट की जा सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह यही है कि ऐसे कोड वाले किसी भी अनजान नंबर की कॉल न उठाई जाए.
सरकारी अधिकारी या पुलिस बनकर आने वाली कॉल
एक और आम तरीका है, जिसमें स्कैमर खुद को पुलिस अधिकारी, कस्टम विभाग या साइबर सेल का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं. इसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम भी कहा जाता है. इसमें पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम पर कोई पार्सल पकड़ा गया है या उसका आधार-मोबाइल नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है. डराकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर बनाए रखा जाता है और पैसे ट्रांसफर करने या ओटीपी शेयर करने के लिए मजबूर किया जाता है.
बैंक और कस्टमर केयर के नाम पर कॉल
कई स्कैमर बैंक अधिकारी, क्रेडिट कार्ड कंपनी या किसी शॉपिंग ऐप का कस्टमर केयर बनकर कॉल करते हैं. ये कॉल आमतौर पर रिफंड, कैशबैक या केवाईसी अपडेट के बहाने की जाती हैं. बातचीत के दौरान स्कैमर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड कराने या सीधे यूपीआई पिन, ओटीपी पूछने की कोशिश करते हैं. असली बैंक कभी भी फोन पर पिन, ओटीपी या पूरा कार्ड नंबर नहीं मांगते.
यह भी पढ़ें: Screen Sharing Scam क्या है, एक कॉल से कैसे हो जाता है UPI Fraud?
शक होने पर क्या करें?
अगर किसी अनजान नंबर से इस तरह की कोई कॉल आती है और आपको शक होता है, तो सबसे पहले शांत रहकर कोई भी निजी जानकारी, ओटीपी या पिन शेयर न करें. सरकार ने ऐसी फर्जी कॉल्स की शिकायत के लिए संचार साथी पोर्टल पर चक्षु सुविधा शुरू की है, जहां जाकर कोई भी व्यक्ति संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट दर्ज करा सकता है.
इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल करके तुरंत मदद ली जा सकती है. समय पर सही कदम उठाने से न सिर्फ आपका बैंक खाता सुरक्षित रह सकता है, बल्कि ऐसे स्कैमर्स पर लगाम लगाने में भी मदद मिलती है.
यह भी पढ़ें: CAPTCHA Code रोबोट ने भरा या इंसान ने, सिस्टम कैसे पता करता है?
