टेक्नोलॉजी की दुनिया में सिर्फ स्मार्ट डिवाइसे ने ही एंट्री नहीं ली है बल्कि लोगों के बातचीत करने का तरीका भी काफी एडवांस हुआ है. अब लोग सेकेंडों में दूसरे तक अपनी बात या मैसेज भेज सकते हैं, फाइलों को शेयर कर सकते हैं और यहां तक की वीडियो कॉल भी कर सकते हैं. लेकिन अब कुछ लोग इस टेक्नोलॉजी से परेशान होने लगे हैं. यही वजह है कि अब लोगों के बीच स्लो टेक यानी जानबूझकर स्लो टेक्नोलॉजी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.
इस ट्रेंड में ऐसे ऐप्स फेमश हो रहे हैं जो मैसेज को तुरंत डिलीवर करने के बजाय यूजर को इंतजार करवाते हैं. यानी डिजिटल दुनिया में फिर से इंतजार करने का दौर लौट रहा है.
क्या है डिजिटल कबूतर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नए ट्रेंड के बीच एक नया ऐप Carrier Pidge ऐप भी लोगों के बीच काफी फेमश हो रहा है. बता दें कि इस ऐप को अप्रैल में पेश किया गया था और अब तक इसके यूजर्स की संख्या करीब 75 हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है.
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इस ऐप की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसमें यूजर डिजिटल कबूतर के जरिए अपने मैसेज भेज सकता है. स्क्रीन पर मैप्स के जरिए ये भी देखा जा सकता है कि कबूतर अभी कहां तक पहुंचा है. इसके अलावा इस ऐप में एक नियम भी है कि कबूतर रास्ते में गायब भी हो सकता है. हालांकि, उसकी संभावना ऐप में 0.2 प्रतिशत रखी गई है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो यूजर को फिर से एक नया डिजिटल कबूतर भेजना होगा जिसके लिए उन्हें 99 सेंट खर्च करने पड़ेंगे.
क्यों लोगों को पसंद आ रहे ये ऐप
दरअसल, इसमें लोगों को कोई पक्षि पसंद आ रहा है, इसलिए लोग इसे नहीं इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि लोगों को अब पहले के जैसे इंतजार करना ज्यादा पसंद आ रहा है. हालांकि, शुरूआत में ये ऐप थोड़ अटपटा सा लग सकता है लेकिन लेकिन इनके पीछे एक गंभीर सोच छिपी हुई है. यहां जानबूझकर पैदा की गई रूकावट लोगों को ज्यादा पसंद आ रही है.
आज के डिजिटल समय में जहां एक तरफ लोग स्मार्टफोन से सेकेंडों में अपने मैसेज भेज रहे हैं, नोटिफिकेशन के जरिए मैसेज देख रहे हैं, वहीं, दूसरी तरफ ये ऐप इस फास्ट ट्रेंड को तोड़ने के लिए पेश किया गया है.
आपको बताते चलें कि कुछ रिसर्च में ये संकेत मिला है कि दिनभर बार-बार थोड़े समय के लिए फोन चेक करना लोगों की मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर डाल रहा है और इतना ही नहीं, ऐसा लंबे समय तक करते रहने से लोग मानसिक रोगी भी बन रहे हैं.
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