- इस प्रक्रिया से सांस्कृतिक/ऐतिहासिक किताबों को नुकसान पहुंचने की चिंता।
Artificial Intelligence: बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी पूरी दुनिया में काफी तेजी से अपने पैर पसार रहा है. लोग एआई को अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, बड़ी-बड़ी एआई कंपनियां आज भी इनको और बेहतर बनाने के ऊपर काम कर रही हैं. इसी कड़ी में बता दें कि एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई कंपनियां किताबों को खरीद कर उन्हें खत्म करने का काम कर रही हैं. आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.
Anthropic का Project Panama क्या है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AI कंपनी Anthropic ने बड़ी संख्या में किताबें खरीदकर उन्हें स्कैन करने का एक खास प्रोसेस अपनाया है जिसे उसने Project Panama नाम दिया है.
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रोसेस में किताबों को नॉर्मल तरीके से स्कैन करने के बजाय उनकी रीढ़ यानी spine को काटकर पन्नों को अलग किया जाता है. इसके बाद अलग किए गए पन्नों को तेज रफ्तार स्कैनिंग मशीनों से डिजिटल रूप में बदला जाता है. यानी यहां किताबों को स्कैन करने के बाद उन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
क्या सिर्फ Anthropic ही ऐसा कर रही है?
इसके बारे में अभी तक कोई पुष्टि नहीं हो पाई है कि ये प्रोसेस सिर्फ एंथ्रोपिक ने अपनाया है या फिर बाकी एआई कंपनियां भी इसे अपना चुकी हैं. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि किताबों की दुकानों और विक्रेताओं को हाल के समय में ऐसी किताबों के बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं जिनकी बिक्री काफी कम होती है. इससे ये अटकल जरूर लगाई गई कि AI कंपनियां बड़े पैमाने पर पुरानी और कम जगहों पर मिलने वाली किताबें खरीद रही हैं.
आखिर किताबों को काटने की जरूरत क्यों?
दरअसल, इसका कारण है समय और लागत. बताया जा रहा है कि नॉर्मल तरीके से किसी किताब को स्कैन करने के लिए हर पेज को संभालकर पलटना पड़ता है. अब बड़ी संख्या में अगर किताबों को स्कैन करना है तो इसमें काफी समय और लागत लगेगी. इसीलिए कंपनी ने किताबों को काटकर उसके सभी पन्नों को एक साथ अलग करना और उन्हें ऑटोमेटेड स्कैनर में डालने का तरीका अपनाया है.
AI मॉडल के लिए करोड़ों पन्नों को डिजिटल डेटा में बदलने की जरूरत को देखते हुए कंपनियां ऐसे प्रोसेस को ज्यादा बेहतर ऑप्शन के रूप में देख रही है. हालांकि, इसके चलते कंपनी की आलोचनाएं भी हो रही हैं और कई सवाल भी सामने आ रहे हैं कि क्या तेज और सस्ता तरीका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक किताबों को नुकसान पहुंचाने की कीमत पर अपनाया जाना चाहिए?
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