Home Technology TV पर कैसे दिखाए जाते हैं Ads? जानें टेक्नोलॉजी और नियम

TV पर कैसे दिखाए जाते हैं Ads? जानें टेक्नोलॉजी और नियम

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जानकारी के अनुसार, टीवी चैनल पहले अपने कार्यक्रमों की एक पूरी ब्रॉडकास्ट प्लेलिस्ट तैयार करते हैं. इसमें शो, न्यूज बुलेटिन, प्रोमो, विज्ञापन और दूसरे कंटेंट की लिस्ट तय होती है. विज्ञापन के लिए चैनल के ब्रॉडकास्ट सिस्टम में अलग-अलग स्लॉट बनाए जाते हैं. जैसे किसी कार्यक्रम के बीच 5 मिनट का ब्रेक है तो उस दौरान कई ऐड्स को एक सिक्वेंस के तहत चलाया जाता है. ये पूरा काम ब्रॉडकास्ट ऑटोमेशन सिस्टम की मदद से किया जाता है. ऑपरेटर को हर ऐड को मैन्युअली चलाने की जरूरत नहीं पड़ती है.

जानकारी के अनुसार, टीवी चैनल पहले अपने कार्यक्रमों की एक पूरी ब्रॉडकास्ट प्लेलिस्ट तैयार करते हैं. इसमें शो, न्यूज बुलेटिन, प्रोमो, विज्ञापन और दूसरे कंटेंट की लिस्ट तय होती है. विज्ञापन के लिए चैनल के ब्रॉडकास्ट सिस्टम में अलग-अलग स्लॉट बनाए जाते हैं. जैसे किसी कार्यक्रम के बीच 5 मिनट का ब्रेक है तो उस दौरान कई ऐड्स को एक सिक्वेंस के तहत चलाया जाता है. ये पूरा काम ब्रॉडकास्ट ऑटोमेशन सिस्टम की मदद से किया जाता है. ऑपरेटर को हर ऐड को मैन्युअली चलाने की जरूरत नहीं पड़ती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बड़े टीवी नेटवर्क में ऐड्स को मैनेज करने के लिए Ad Server और Traffic Management System का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें ऐड की फाइल, उसका पीरियड, कैंपेन की जानकारी और उसे कब चलाना है जैसी डिटेल मौजूद होती हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बड़े टीवी नेटवर्क में ऐड्स को मैनेज करने के लिए Ad Server और Traffic Management System का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें ऐड की फाइल, उसका पीरियड, कैंपेन की जानकारी और उसे कब चलाना है जैसी डिटेल मौजूद होती हैं.

जैसे किसी कंपनी ने शाम के समय ऐड दिखाने के लिए स्लॉट खरीदा है. इसके बाद सिस्टम ये चेक करने में मदद करता है कि जिस समय ऐड का स्लॉट फिक्स है वो उसी समय पर चले.

जैसे किसी कंपनी ने शाम के समय ऐड दिखाने के लिए स्लॉट खरीदा है. इसके बाद सिस्टम ये चेक करने में मदद करता है कि जिस समय ऐड का स्लॉट फिक्स है वो उसी समय पर चले.

टीवी चैनल का कंटेंट पहले ब्रॉडकास्ट सेंटर से तैयार होता है. वहां से सिग्नल को सैटेलाइट, फाइबर के जरिए अलग-अलग इलाकों तक भेजा जाता है. इसके बाद DTH, केबल या दूसरे टीवी प्लेटफॉर्म उस सिग्नल को दर्शकों के घर तक पहुंचाते हैं.

टीवी चैनल का कंटेंट पहले ब्रॉडकास्ट सेंटर से तैयार होता है. वहां से सिग्नल को सैटेलाइट, फाइबर के जरिए अलग-अलग इलाकों तक भेजा जाता है. इसके बाद DTH, केबल या दूसरे टीवी प्लेटफॉर्म उस सिग्नल को दर्शकों के घर तक पहुंचाते हैं.

एडवांस सिस्टम में अलग-अलग फीड तैयार करना संभव है जिससे किसी खास एरिया के ऑडिएंस के लिए अलग ऐड स्लॉट इस्तेमाल किए जा सकते हैं. यही वजह है कि टीवी पर ऐड दिखाना सिर्फ वीडियो चलाने के प्रोसेस जैसा नहीं होता है बल्कि इसमें कई लेवल पर टेक्निकल सिस्टम काम करते हैं.

एडवांस सिस्टम में अलग-अलग फीड तैयार करना संभव है जिससे किसी खास एरिया के ऑडिएंस के लिए अलग ऐड स्लॉट इस्तेमाल किए जा सकते हैं. यही वजह है कि टीवी पर ऐड दिखाना सिर्फ वीडियो चलाने के प्रोसेस जैसा नहीं होता है बल्कि इसमें कई लेवल पर टेक्निकल सिस्टम काम करते हैं.

आपको बता दें कि किस शो में कितने ऐड्स दिखेंगे, ये कई चीजों पर निर्भर करता है. इनमें कार्यक्रम का समय, ऐडवर्टाइजर्स की बुकिंग, चैनल का ऐड प्लान और नियम शामिल होते हैं. ऐड चलाने वाली कंपनी आमतौर पर चैनल से तय समय या कार्यक्रम के आसपास का ऐड स्लॉट खरीदते हैं. फेमश कार्यक्रमों के दौरान ऐड की कीमत ज्यादा होती है क्योंकि उस समय ऑडिएंस की संख्या काफी ज्यादा होती है.

आपको बता दें कि किस शो में कितने ऐड्स दिखेंगे, ये कई चीजों पर निर्भर करता है. इनमें कार्यक्रम का समय, ऐडवर्टाइजर्स की बुकिंग, चैनल का ऐड प्लान और नियम शामिल होते हैं. ऐड चलाने वाली कंपनी आमतौर पर चैनल से तय समय या कार्यक्रम के आसपास का ऐड स्लॉट खरीदते हैं. फेमश कार्यक्रमों के दौरान ऐड की कीमत ज्यादा होती है क्योंकि उस समय ऑडिएंस की संख्या काफी ज्यादा होती है.

भारत में टीवी ऐड्स पर कई तरह के नियम लागू होते हैं. ऐड भ्रामक नहीं होना चाहिए और कुछ प्रोडक्ट्स या सर्विसेज के प्रचार पर प्रतिबंध भी हो सकता है. टीवी चैनलों को विज्ञापन और कार्यक्रम की प्रस्तुति से जुड़े लागू ब्रॉडकास्टर्स नियमों का पालन करना होता है. खासतौर पर बच्चों को प्रभावित करने वाले विज्ञापनों, स्वास्थ्य संबंधी ऐड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैन प्रोडक्ट्स के प्रचार में ज्यादा सावधानी की जरूरी होती है.

भारत में टीवी ऐड्स पर कई तरह के नियम लागू होते हैं. ऐड भ्रामक नहीं होना चाहिए और कुछ प्रोडक्ट्स या सर्विसेज के प्रचार पर प्रतिबंध भी हो सकता है. टीवी चैनलों को विज्ञापन और कार्यक्रम की प्रस्तुति से जुड़े लागू ब्रॉडकास्टर्स नियमों का पालन करना होता है. खासतौर पर बच्चों को प्रभावित करने वाले विज्ञापनों, स्वास्थ्य संबंधी ऐड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैन प्रोडक्ट्स के प्रचार में ज्यादा सावधानी की जरूरी होती है.

Published at : 15 Aug 2026 07:14 PM (IST)

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