Saturday, April 18, 2026
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हरिवंश नारायण बने राज्यसभा के उपसभापति! पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ, सुनाई उनके जीवन की पूरी कहानी

हरिवंश नारायण को एक बार फिर राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और उनकी जमकर तारीफ की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना यह दिखाता है कि पूरे सदन को हरिवंश जी पर कितना भरोसा है. उन्होंने कहा कि हरिवंश नारायण ने अपने पिछले कार्यकाल में सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की है और उनके अनुभव का फायदा पूरे सदन को मिला है.

पीएम मोदी ने उनके जीवन के बारे में भी बात की. उन्होंने बताया कि हरिवंश नारायण का पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी से गहरा जुड़ाव रहा है. उन्होंने चंद्रशेखर जी के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 17 अप्रैल को ही चंद्रशेखर जी की जयंती होती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश नारायण का लंबा अनुभव पत्रकारिता में रहा है. उन्होंने हमेशा ऊंचे मानकों के साथ काम किया है. उनकी लेखनी तेज रही है, लेकिन बोलने का तरीका हमेशा शांत और सधा हुआ रहा है

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हरिवंश नारायण के अनुभव का जिक्र

पीएम मोदी ने यह भी बताया कि हरिवंश नारायण का जन्म जेपी के गांव में हुआ था और उनकी पृष्ठभूमि ग्रामीण रही है. इसी वजह से उन्होंने अपने गांव और समाज के लिए भी काम किया है. उनकी पढ़ाई काशी में हुई है. आखिर में प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश नारायण का अनुभव राज्यसभा को बेहतर तरीके से चलाने में मदद करता है और उम्मीद है कि उनका नया कार्यकाल भी उसी समर्पण और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ेगा.

हरिवंश ने उच्च सदन की सदस्यता की शपथ कब ली?

मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित किया गया. पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश का यह उपसभापति के रूप में तीसरा कार्यकाल है. राज्यसभा के उपसभापति का पद हरिवंश का उच्च सदन में कार्यकाल 9अप्रैल को समाप्त होने के बाद रिक्त हो गया था. इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया. हरिवंश ने 10 अप्रैल को उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली. केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति निर्वाचित किए जाने के लिए पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन एस फांग्नोन कोन्यक ने किया. 

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