Thursday, April 16, 2026
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यौन उत्पीड़न, बलात्कार और धर्म परिवर्तन…, TCS नासिक केस में HR निदा खान फरार, अब तक क्या-क्या हुआ?

TCS Nashik Unit Sexual Harassment Case: यौन उत्पीड़न, बलात्कार और धर्म परिवर्तन मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है. यहां टीसीएस नासिक केस में एचआर निदा खान फरार हो गई हैं. फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. यह केस इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि मामला देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी से जुड़ा है.  एफआईआर में पूरा घटनाक्रम दर्ज किया गया है. ऐसे में अबतक क्या-क्या हुआ है, इस पूरे मामले में आइए जानते हैं. 

FIR से जानकारी मिली है कि पिछले कई सालों में की गई शिकायतों पर कथित तौर पर समय रहते किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई. मामले में आठ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि 2022 से लेकर 2026 की शुरुआत तक उनके साथ लगातार यौन, उत्पीड़न, बलात्कार, सहकर्मियों पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश, और जोर-जबरदस्ती अपमान किया गया. इसके अलावा HR डिपार्टमेंट-POSH भी सवालों के घेरे में है. POSH से जुड़े अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है. एसआईआईटी इस मामले में जांच कर रही है. पूरे मामले में 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. 

गिरफ्तार किए लोगों में आसिफ अंसारी, दानिश शेख, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार है. POSH से जुड़े ऑपरेशंस मैनेजर अश्विन चैनानी को भी गिरफ्तार किया गया है. एचआर निदा खान फरार हैं. 

कंपनी ने पूरे मामले में क्या कहा है? 

इधर, टीसीएस ने कहा है कि उसने जांच के दायरे में आए सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. कंपनी कानूनी एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आरोपों को बेहद ही चिंताजनक और दुखद बताया है. इस मामले के पूरी गंभीरता से कंपनी के स्तर पर लिया जा रहा है. तथ्यों का पता लगाने और दोषियों की पहचान करने के लिए जांच चल रही है.

कंपनी की पॉलिसी क्या करती है इस तरह के मामले में? 

कंपनी से जुड़े लोग औपचारिक शिकायत निवारण स्ट्रक्चर के आधार पर उत्पीड़न और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों में शिकायत कर सकते हैं. कंपनी का मानना है कि शिकायतों की समीक्षा की जाती है. यदि वे सही पाई जाती है, तो उन पर कार्रवाई की जाती है. पूरे मामले को गोपनीय तरीके से निपटाया जाता है. इसके अलावा शिकायत कर्ता पर बदले की कार्रवाई नहीं की जाती है. इस मामले में कंपनी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाती है. 

कानून क्या कहता है? 
POSH अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न की शिकायतों को औपचारिक रूप से दर्ज किया जाता है. इस पूरे मामले को इंटरनल कमिटी देखती है. मामले को समय सीमा के अंदर निपटाती है. 

इस पूरे मामले में 90 दिनों के भीतर जांच होना चाहिए. दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है. शिकायतों को गोपनीय तरीके से निपटाया जाता है. ऐसे में शिकायत कर्ता को सुरक्षा मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है. शिकायत को केवल सुपरवाइजर के सत्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. न ही उन्हें अनौपचारिक तरीके से निपटाया जाना चाहिए.

FIR में क्या जानकारी दी गई है? 

  • इस मामले में 9 FIR दर्ज की गई हैं. इसमें कई टीमों के भीतर अलग-अलग समय अवधियों में कथित दुर्व्यवहार के एक पैटर्न का जिक्र है. तौसीफ अत्तार, दानिश शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और शफी शेख सहित कर्मचारियों पर इन चीजों के आरोप लगे हैं.
  • इसके अलावा ऑफिस परिसर के अंदर गलत तरीके से छूना, शारीरिक नजदीकी बनाने की कोशिश करना. महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी और निजी जिंदगी पर अश्लील टिप्पणियां करना और बातें करना. मीटिंग के दौरान गलत तरीके से घूरना और अश्लील इशारे करना. बार-बार जबरदस्ती बातचीत शुरू करने या शारीरिक नजदीकी बनाने की कोशिश करना, जैसे आरोप का जिक्र है. 

शादी का वादा कर बनाए शारीरिक संबंध, महिला का आरोप

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, महिलाओं ने आरोप लगाया कि अत्तार ने शादी का वादा किया. उसी आधार पर शारीरिर संबंध बनाए. उस युवती ने तीन सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, डराने-धमकाने और उसे जबरदस्ती इस्लाम कबूल करवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. 

अन्य महिलाओं ने बार-बार अपमानित होने की बात कही है. इसमें बच्चे न होने के ताने मारना. मना करने के बावजूद शारीरिक नजदीकी बनाने की कोशिश करना शामिल है. इनके अलावा हिंदू धर्म पर अपमानजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया.  एक शिकायत में महिला का आरोप है कि रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी की शिकायत वरिष्ठ अधिकारी से की गई. लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. 

टीसीएस में पिछले कई सालों में यौन उत्पीड़न मामले में हुई बढ़ोतरी

पिछले कुछ सालों में सामने आया है कि यौन उत्पीड़न मामले में बढ़ोतरी देखी गई है. पिछले तीन सालों में पता चला है कि टीसीएस में यौन उत्पीड़न की दर्ज शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट की मानें तो कंपनी ने इसका आंशिक श्रेय जागरुकता बढ़ाने को दिया है. टीसीएस ने वित्त वर्ष 2025 में 125, 2024 में 110 और 2023 में 49 शिकायत दर्ज की. साथ ही 2022 में 36 और 2021 में 27 मामले सामने आए हैं. 

2025 में 78 शिकायत दर्ज पाई गईं. 23 शिकायतों का निराकरण नहीं हुआ. शिकायतकर्ता में सिर्फ 0.06 महिला कर्मचारी थीं. 2024 में 0.05 प्रतिशत और 2023 में 0.03 प्रतिशत महिलाएं थी. 

इनके हवाले कंपनी की इंटरनल जांच 

इस मामले में टीसीएस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आरती सुब्रमण्यम जांच का नेतृत्व करेंगी. उन्होंने कहा कि जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ उचित और सख्त कार्रवाई की जाएगी. किसी भी प्रक्रिया में सुधार या सुधारात्मक उपायों को तुरंत लागू किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: क्या चुनावी फायदे के लिए लाया गया महिला आरक्षण विधेयक? किरेन रिजिजू ने दिया जवाब

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