Wednesday, April 15, 2026
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Telangana: मुलुगु में दर्दनाक हादसा, बंदरों के लिए रखे जहरयुक्त भोजन से 4 साल के बच्चे की मौत; लापरवाही पर केस दर्ज

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  • पुलिस मामले की जांच कर रही है, आरोपी की तलाश जारी।

तेलंगाना के मुलुगु जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां बंदरों को मारने के लिए रखा गया जहरयुक्त भोजन खाने से एक चार साल के बच्चे की मौत हो गई. यह घटना रविवार (12 अप्रैल, 2026) को गोविदारावपेट मंडल में हुई, जिसने पूरे इलाके को झकझोरकर रख दिया है और मानव-वन्यजीव संघर्ष के खतरनाक पहलू को उजागर किया है.

मृतक की पहचान हर्षवर्धन के रूप में हुई है, जो अपनी बहनों वर्षिणी (9) और जानु (6) के साथ आंगनवाड़ी केंद्र के पास खेल रहा था. पुलिस के अनुसार, इलाके में लंबे समय से बंदरों का आतंक बना हुआ है, जो घरों से खाना उठाकर ले जाते हैं. इस समस्या से परेशान होकर कुछ लोगों ने बंदरों को मारने के लिए घरों के बाहर जहर मिला भोजन रखना शुरू कर दिया था.

मिड डे मील समझकर बच्चे ने खा लिया जहरयुक्त खाना

घटना के दिन बच्चों ने आंगनवाड़ी परिसर में रखा भोजन देखा और उसे नियमित पोषण आहार समझकर खा लिया. पुलिस के मुताबिक, बड़ी बहनों को भोजन का स्वाद अलग लगा, जिससे उन्होंने तुरंत उसे थूक दिया, लेकिन छोटा बच्चा हर्षवर्धन उसे निगल गया और घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. परिजनों ने उसे तुरंत वारंगल के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई.

पुलिस जहर मिला खाना रखने वाले की कर रही तलाश

पुलिस ने इस मामले में लापरवाही से मौत का केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि जहरीला भोजन किसने रखा था और क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है. एक ओर जहां गांवों में बंदरों की बढ़ती समस्या लोगों के लिए परेशानी बन रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे खतरनाक उपाय अपनाना निर्दोष लोगों, खासकर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समस्याओं का समाधान प्रशासनिक और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए, न कि असुरक्षित और अवैध उपायों से. यह घटना एक चेतावनी है कि लापरवाही और गलत फैसले किस तरह एक मासूम की जान ले सकते हैं.

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