देश में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ दक्षिणी राज्यों में विरोध तेज होता जा रहा है, जबकि संसद के विशेष सत्र से पहले सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों तक, इस मुद्दे पर लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
स्टालिन ने बुलाई DMK सांसदों की आपात बैठक
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बुधवार को DMK सांसदों की एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जाएगी. यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए धर्मपुरी से आयोजित की जाएगी. DMK सांसद कनिमोझी ने AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें तमिलनाडु की लोकसभा सीटों में संभावित कमी की कोई चिंता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि AIADMK केंद्र के रुख का समर्थन कर रही है, जिससे राज्य के अधिकारों को नुकसान हो सकता है. कनिमोझी ने यह भी कहा कि DMK हमेशा से महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करती रही है और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं.
‘डिग्रेसिव प्रपोर्शनैलिटी’ मॉडल
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने लोकसभा सीटों के संतुलन के लिए ‘डिग्रेसिव प्रपोर्शनैलिटी’ मॉडल का सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी दलों और राज्यों से विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, वरना यह संघीय ढांचे के लिए खतरा बन सकता है.
तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी की पहल
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सभी दक्षिणी राज्यों से एकजुट होने की अपील की है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. उन्होंने एक ‘हाइब्रिड मॉडल’ का सुझाव दिया है, जिसमें 50% सीटें जनसंख्या के आधार पर और 50% GDP व प्रदर्शन मानकों के आधार पर तय की जाएं.
खड़गे की अध्यक्षता में विपक्षी बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को विपक्षी दलों की अहम बैठक करेंगे, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर रणनीति तय की जाएगी. इस बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. इसके बाद खड़गे अपने आवास पर अन्य विपक्षी नेताओं की बैठक भी करेंगे.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बिलों में जो प्रावधान हैं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासनों के खिलाफ हैं. जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि दक्षिणी और छोटे राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी घट जाएगी और यह संघीय ढांचे के लिए नुकसानदायक होगा.
केंद्र सरकार और NDA का पक्ष
वहीं सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए परिसीमन को जरूरी कदम बताया है. सरकार का कहना है कि 2029 तक महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है. NDA ने इस कदम का समर्थन करते हुए इसे ‘ऐतिहासिक सुधार’ बताया है. महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलों पर संसद के विशेष सत्र में चर्चा होगी, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. विपक्ष ने इसे संघीय संतुलन के खिलाफ बताया है, जबकि सरकार इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बता रही है.



