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इंडो-पैसिफिक में भारत की धमक, अभ्यास काकाडू 2026 में INS नीलगिरी ने दिखाया दम

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हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की ताकत अब साफ दिखने लगी है. भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) का हाईटेक युद्धपोत (वॉरशिप) आईएएनएस नीलगिरी ऑस्ट्रेलिया में हो रहे अभ्यास काकाडू 2026 के समुद्री चरण में हिस्सा लेकर दुनिया को भारत की रणनीतिक मौजूदगी का एहसास कर रहा है. 

इस अभ्यास के जरिए भारत अन्य देशों के साथ तालमेल, सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है. नेवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इस अभ्यास का मकसद अन्य नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सहयोग और समुद्री समझ को और मजबूत करना है. साथ ही ये हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर देशों के बीच साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करता है. 

क्या है अभ्यास काकाडू
बता दें कि अभ्यास काकाडू ऑस्ट्रेलिया की तरफ से आयोजित एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की कई नौ सेनाएं हिस्सा लेती हैं और संयुक्त रूप से कई समुद्री अभियानों का अभ्यास करती हैं.

नौसेना में शामिल होने जा रहा तारागिरी 
नेवी इसी बीच नीले समुंद्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक के बाद एक कई स्वदेशी वॉरशिप इसमें शामिल कर रही है. 2047 तक भारत की पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं. लगातार नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में प्रोजेक्ट 17ए के तहत नीलगिरी क्लास का एडवांस गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी नौसेना में शामिल होने जा रहा है.

नौसेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार अगले महीने यानी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में तारागिरी को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा. इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं इस गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट को नौसेना को समर्पित करेंगे. साल 2026 की शुरुआत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अंजदीप को भी नौसेना में शामिल किया गया था.

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