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डिजिटल अरेस्ट पर सरकार का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: व्हाट्सएप पर ID होगी ब्लॉक, स्काइप जैसे सेफ्टी फीचर्स होंगे लागू

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डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर मोदी सरकार एक्शन में आ गई है. सरकार ने व्हाट्सएप को डिजिटल अरेस्ट इस्तेमाल हो रहे डिवाइस आईडी को ब्लॉक करने का आदेश दिया है. आरोपी बहुत से स्कैम में व्हाट्सएप के जरिए विक्टिम को व्हाट्सएप कॉल, मैसेज और वीडियो कॉल करते हैं.

सरकार के आदेश के बाद अब व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर स्काइप जैसी सेफ्टी फीचर्स लागू करने पर विचार हो रहा है. IT Rules 2021 के तहत डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा सकता है, जिससे जांच एजेंसियों को जांच करने में मदद मिल सके. खतरनाक APK और फर्जी ऐप्स को पहचानकर उनको भी ब्लॉक करने की योजना है. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) ने व्हाट्सएप को डिजिटल गिरफ्तारी के खतरे से निपटने के लिए कुछ प्रमुख उपाय लागू करने को कहा है, जिनमें धोखाधड़ी करने के लिए पुलिस और कानून अधिकारियों का हुलिया बनाना जैसे अपराध भी शामिल हैं.

सूत्रों ने बताया कि मेटा के स्वामित्व वाली मैसेजिंग सेवा ने इन उपायों को लागू करने पर सहमति जताई है और इनमें से कुछ को लागू करने की प्रक्रिया जारी है. पता चला है कि दिसंबर 2025 में गठित आईडीसी की तीसरी बैठक के दौरान व्हाट्सएप के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई थी

क्या होती है डिवाइस आईडी
डिवाइस आईडी असल में किसी भी गैजेट की पहचान होती है, जो यूनिक नंबर होता है और ये ठीक वैसा ही होता है जैसा कि भारत में हर भारतीय का आधार नंबर होता है. डिवाइस आईडी कई तरह की हो सकती है, जिसमें IMEI नंबर, मैक एड्रेस, डिवाइस सीरियल नंबर होता है. IMEI नंबर मोबाइल नेटवर्क में फोन की पहचान के लिए यूज होता है. MAC एड्रेस Wi-Fi या नेटवर्क पहचान के लिए यूज किया जाता है.

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट 
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में आरोपी खुद को पुलिस बताकर विक्टिम को डराते हैं और पैसे ठगते हैं. व्हाट्सएप का यूज करके वे अलग-अलग बहाने बनाकर पहले विक्टिम को डराते हैं, फिक गिरफ्तारी की धमकी देते हैं. इसके बाद उनको किसी दूसरे शहर में जांच के लिए बुलाते हैं और जब विक्टिम दूसरे शहर नहीं पहुंच पाता तो उसे डिजिटली जांच में सहयोग करने को कहते हैं. इसी को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. 

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