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पहली बार चुनावी ऐलान के बाद बंगाल में इलेक्शन कमीशन ने हटाए इतने अधिकारी, क्या पड़ेगा असर?

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मुख्य चुनाव आयुक्त बनाम ममता बनर्जी के बीच जुबानी जंग लंबे वक्त से जारी है. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ टीएमसी ने महाभियोग का नोटिस दे रखा है. बंगाल में आचार संहिता लगते ही आयोग ने सबसे सबसे पहले आईपीएस के सबसे बड़े अधिकारी राज्य डीजीपी, और आईएएस के सबसे बड़े अधिकारी मुख्य सचिव को हटाया. उसके बाद तो गृह सचिव, कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, एसपी और डीएम तक पहुंच गई. अबतक 30 से ज्यादा आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं. 

किसी अधिकारी को हटाता EC तो क्या असर पड़ता है?

चुनाव आयोग अगर किसी अधिकारी को चुनाव के दौरान अपने पद से हटाता है, तो उसपर प्रभाव पड़ता है. उसके कैरियर पर दाग लग जाता है. EC तबादला करती है तो माना जाता है कि अधिकारी सत्ताधारी दल के प्रति निष्पक्ष नहीं था, जिससे उसकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है. यह ट्रांसफर केवल चुनावी प्रक्रिया खत्म होने तक प्रभावी हो सकता है, लेकिन करियर रिकॉर्ड में यह दर्ज रहता है.

अधिकारी आयोग के फैसले के खिलाफ कर सकता है अपील

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, यदि कोई अधिकारी चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही, पक्षपात, या कर्तव्य में चूक करता है, तो ECI उसे हटा सकता है, सस्पेंड कर सकता है, या उसकी जगह किसी अन्य को नियुक्त कर सकता है. यह कार्रवाई मुख्य रूप से चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए होती है, लेकिन इसका अधिकारी के करियर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, अधिकारी आयोग के फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकते हैं. 

प्रमोशन पर पड़ता है असर

वो अधिकारी कभी चुनाव आयोग में काम नही कर सकता. एक बार अगर किसी चुनाव के दौरान हटाया गया तो किसी भी चुनाव में वो चुनाव के महत्वपूर्ण पद पर नही रह सकता. उदाहरण के लिए अगर एक डीएम को चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान हटा दिया तो वो किसी भी चुनाव में डीएम पद पर नही रह सकता. इसके अलावा प्रमोशन पर भी असर पड़ता है.

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