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ईरान जंग का असर, भारत में महंगी हुई दवाइयां; फार्मा संगठन ने सरकार को भेजी इमरजेंसी रिपोर्ट

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ईरान जंग का असर अब सीधे भारत की दवाओं तक पहुंच गया है. कच्चे माल के बाद अब बाजार में पैरासिटामोल, एमोक्सिसिलिन, मेटफॉर्मिन और एज़िथ्रोमाइसिन जैसी आम जरूरत की दवाओं  पर असर देखने को मिल रहा है.  एसोसिएशन ने बताया  `ये वो दवाएं हैं जो बुखार, शुगर, इंफेक्शन और सांस की बीमारी में रोज लाखों मरीज लेते हैं.`

फर्मा संगठन ने सरकार को भेजी इमरजेंसी रिपोर्ट

फेडरेशन ऑफ फार्मा आंत्रप्रेन्योर्स  ने  भी केंद्र सरकार को एक इमरजेंसी पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर अभी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो देश में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो सकती है. FOPE के पत्र के मुताबिक  एक्टिव फर्मासूटिकल इंग्रीडियेंट यानी APIs ( कच्चे  माल ) की कीमत महज 8-9 दिनों में 20% से 60% तक बढ़ गई है. इसके साथ ही दवा बनाने में काम आने वाले केमिकल सॉल्वेंट और इंटरमिडिएट की सप्लाई भी अनियमित हो गई है जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है.

सिर्फ कच्चा माल ही नहीं, पीवीसी कंपाउंड, बोतलें, फिल्म, एल्यू-एल्यू और फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी कई गुना बढ़ गई हैं. FOPE का कहना है कि इससे मौजूदा प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट घाटे के सौदे बन गए हैं.

संकट के बीच भारतीय जहाज शिवालिक मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा
इस संकट के बीच भारतीय जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करते हुए सुरक्षित वापसी की है, जो एक बड़ी राहत की खबर है. कल (17 मार्च 2026) भारतीय जहाज शिवालिक मुंद्रा पोर्ट पर करीब 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर पहुंचा, जो लगभग 3.24 मिलियन घरेलू गैस सिलिंडर के बराबर है. आज तड़के 2:30 बजे दूसरा जहाज नंदा देवी गुजरात के वडिनार पोर्ट पर 46,500 मीट्रिक टन LPG के साथ पहुंच गया. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने दो वॉरशिप्स को होर्मुज स्ट्रेट के पास तैनात किया था ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षा हो सके और ईरान ने इन भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने दिया.

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