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‘जाओ लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो’, सुप्रीम कोर्ट को याचिकाकर्ता से क्यों कहनी पड़ी ऐसी बात?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च, 2026) को लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी की याचिका खारिज करते हुए उनसे कहा कि जाओ 2-3 और स्वेटर बेचो. व्यापारी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से याचिका तैयार की थी और जैसे ही कोर्ट को उन पर शक हुआ तो उन्होंने व्यापारी से दो तीन सवाल किए, जिनका वह जवाब नहीं दे सके.

व्यापारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने याचिका का मसौदा तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल किया है. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उनसे कुछ जटिल कानूनी शब्दों के बारे में भी पूछा, जिनकी व्याख्या वह नहीं कर सके.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘जाओ, लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो… जिन लोगों का काम है ऐसी याचिका दाखिल करना, वो नुकसान कर देंगे आपका जुर्माना लगवा कर.’

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच को उस वक्त शक हुआ जब 12वीं कक्षा तक पढ़े कपड़ा व्यापारी रजनीश सिद्धू ‘पीएम केयर फंड’ से संबंधित अपनी याचिका पर बहस करने के लिए खड़े हुए. सिद्धू ने जैसे ही लिखित दलीलें पढ़नी शुरू कीं, सीजेआई सूर्यकांत ने उनकी एजुकेशन और बैकग्राउंड को लेकर सवाल किए.

जब याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने पहले कोई याचिका दायर नहीं की थी और वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपनी पहली याचिका दायर करने आया है, तो सीजेआई सूर्यकांत ने व्यंग्यपूर्वक कहा, ‘बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलकर आ गए.’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘मैं यहीं आपकी अंग्रेजी की परीक्षा लूंगा और अगर आप 30 प्रतिशत अंक भी प्राप्त कर लेते हैं, तो मैं मान लूंगा कि आपने ही यह याचिका तैयार की है.’ इसके बाद सीजेआई ने जनहित याचिका में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों के बारे में पूछा, जिसका सिद्धू जवाब नहीं दे सके. साथ ही याचिकाकर्ता ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने याचिका तैयार करने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल किया.

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