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Meghalaya Politics: | Meghalaya Assembly NCP MLA Mehtab Sangma questioned CM Conrad Sangma about delay in livestock education projects

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मेघालय विधानसभा में बुधवार (25 फरवरी 2026) को एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब सीएम मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा की पत्नी मेहताब चांदी ए संगमा आपस में भिड़ गए. NCP विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने अपने पति मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से तीन साल पहले कैबिनेट की ओर से मंजूर किए गए पशुधन शिक्षा से जुड़े अहम परियोजनाओं में देरी को लेकर सवाल उठाए. कार्यवाही के दौरान गाम्बेग्रे की विधायक ने 2022 में स्वीकृत प्रस्तावित एनिमल मेडिकल यूनिवर्सिटी, दो फिशर यूनिवर्सिटी और एक डेयरी यूनिवर्सिटी की वर्तमान स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा. उन्होंने राज्य के एनिमल मेडिकल ट्रेनिंग सेंटरों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया. सदन में यह बहस इसलिए भी खास रही, क्योंकि विधायक दंपति के बीच इस तरह की गंभीर चर्चा कम ही देखने को मिलती है.

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की ओर से जवाब देते हुए मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने कहा कि इन संस्थानों की परिकल्पना मेघालय के पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने के मकसद से की गई थी. उन्होंने कहा, ‘राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन से जुड़ी है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इन तीन कॉलेजों की स्थापना का फैसला लिया गया था. ‘एनिमल मेडिकल सेंटर में स्टाफ की कमी को लेकर उन्होंने माना कि यह चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, ‘यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है. जल्द से जल्द ह्यूमन रिसॉर्स की कमी को पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.’ उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि खाली जगहों को भरना प्राथमिकता में रखा जाएगा.

DPR तैयार करने को लेकर दिया जवाब

डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में देरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि भूमि की पहचान और आवश्यक मानव संसाधन के आकलन में समय लगने के कारण प्रक्रिया लंबी हुई. प्रस्तावित पशु चिकित्सा महाविद्यालय के लिए री-भोई जिले के किर्देमकुलाई में लगभग 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 334 करोड़ रुपये है और इसमें 19 विभाग स्थापित किए जाने की योजना है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘वित्तीय आवश्यकता काफी बड़ी है, जो हमारे लिए चिंता का विषय है, लेकिन साथ ही उन्होंने सदस्यों को आश्वस्त किया कि प्रक्रिया को तेज करने के प्रयास किए जाएंगे.’ इस चर्चा ने मेघालय में पशुधन शिक्षा और ग्रामीण रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला दिया, वहीं विधानसभा में एक असामान्य घरेलू राजनीतिक समीकरण भी सार्वजनिक रूप से देखने को मिला.

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