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ओडिशा में 7 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, फर्जी खातों के जरिए हुआ बड़ा लेनदेन

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डिजिटल जमाने में बदलते समय के साथ ठगी के हथकंडे भी बदलते जा रहे हैं. हाल के समय में साइबर फ्रॉड के मामलों में इजाफा देखने को मिला है. ठग नए-नए तरीकों से फ्रॉड कर रहे हैं. ओडिशा के बरगढ़ जिले में करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है. इस मामले में फर्जी (म्यूल) बैंक खातों के जरिए 7 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है.

दो संदिग्ध खातों की हुई जांच

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी 2026 की रात 11:23 बजे पदमपुर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रमिला मरेई ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की. यह कार्रवाई एसपी, CID-CB, ओडिशा, कटक के निर्देश पर की गई. जांच के दौरान पदमपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और यूको बैंक की शाखाओं में खोले गए दो संदिग्ध खातों की जांच की गई. जांच में पता चला कि एक खाता आदर्श गिधिली (23) और दूसरा खाता सब्या प्रधान (23) के नाम पर खोला गया था.

अलग-अलग बैंकों में खुलवाए गए 6 अकाउंट

आगे की जांच में खुलासा हुआ कि ये खाते अमन साहू (27), निवासी सहूपाड़ा, पदमपुर द्वारा खुलवाए गए थे. पूछताछ के दौरान अमन साहू ने स्वीकार किया कि उसने आदर्श गिधिली, सब्या प्रधान, राहुल राणा, शुभम मेहर, चंद्रकांत साहू और रश्मिकांत सुनानी के नाम पर विभिन्न बैंकों में कुल छह खाते खुलवाए थे. उसने इन खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड चांदनी अग्रवाल उर्फ मित्तल (35), निवासी बरगढ़, को सौंप दिए थे.

2024-25 में हुआ बड़ा लेनदेन

वर्ष 2024-25 के दौरान इन खातों में भारी रकम का लेनदेन पाया गया. जांच में सामने आया कि इन खातों के माध्यम से 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि साइबर ठगी से संबंधित है. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 340(1), 61(2)(b), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और साइबर ठगी से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है.

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