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Mohan Bhagwat: RSS चीफ मोहन भागवत का देश को बड़ा मैसेज! कहा- ‘हिंदू होने के लिए…’

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देहरादून में आयोजित प्रमुख जन संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज की एकता और संगठित शक्ति पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जब समाज शक्ति की उपासना करना छोड़ देता है, तब वह संख्या में अधिक होने के बावजूद अशक्त हो जाता है. उन्होंने कहा कि सशक्त समाज अपने ही देश में असुरक्षित महसूस करने लगता है, इसलिए संगठित बल की साधना अत्यंत आवश्यक है.

भागवत ने कहा कि विश्व सत्य की अपेक्षा शक्ति को अधिक महत्व देता है. यदि समाज संगठित और सशक्त नहीं होगा तो उसकी बात प्रभावी नहीं होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन ही राष्ट्र उत्थान का मूलाधार है और इसी संकल्प के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्य कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि संघ को केवल बाहरी दृष्टि से समझना संभव नहीं है, बल्कि उसे अनुभव करने की आवश्यकता है.

मोहन भागवत ने समाज को लेकर क्या कहा?

भागवत ने कहा कि संघ किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया में स्थापित नहीं हुआ और न ही वह किसी के विरोध या प्रतिस्पर्धा के लिए कार्य करता है. संघ का सत्ता से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है. उसका उद्देश्य किसी एक दल या गुट का निर्माण करना नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज को संगठित कर उसे बलवान बनाना है. उन्होंने कहा कि संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है, क्योंकि सशक्त व्यक्ति से ही सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है. भागवत ने कहा कि संघ द्वारा तैयार स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी एक राजनीतिक दल है और वहां कार्यरत स्वयंसेवकों की गतिविधियों को संघ का औपचारिक कार्य मानना उचित नहीं है.

हिंदू की अवधारणा पर बोले भागवत

भागवत ने कहा कि एकता के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं है. इतिहास में भारत को बार-बार गुलामी का सामना करना पड़ा, क्योंकि हम अपने आत्मस्वरूप को भूल गए थे. संघ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलना और उनमें एकात्मता की भावना विकसित करना है. हिंदू की अवधारणा पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भाषा, पंथ, संप्रदाय और खान-पान में विविधता स्वाभाविक है, किंतु मूल तत्व एक ही है. उन्होंने कहा कि हिंदू होने के लिए एकरूपता नहीं, बल्कि एकता आवश्यक है. परस्पर सम्मान और समन्वय ही भारतीय संस्कृति की विशेषता है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत अपनी परंपरागत ज्ञान परंपरा और संस्कारों के आधार पर विश्व को दिशा देने में सक्षम होगा.

संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख

संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध राजद्रोह के मुकदमे में उन्होंने निर्भीकता से प्रश्न उठाया था कि मुट्ठी भर अंग्रेजों को भारत पर शासन करने का अधिकार किसने दिया. स्वतंत्रता को जन्मसिद्ध अधिकार बताते हुए उन्होंने संघर्ष का मार्ग चुना और उसी संकल्प से संघ की स्थापना की गई, ताकि भारत पुनः पराधीन न हो.

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