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ट्रंप के 15% टैरिफ से क्या बदलेगा? चीन समेत इन देशों को फायदा, भारत को लेकर मूडीज ने क्या किया दावा

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से टैरिफ को गैरकानूनी करार देने के बाद बौखलाए ट्रंप ने 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया. ट्रंप के इस फैसले से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुछ देशों को लाभ मिल सकता है जिन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा है. इनमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकतर देश शामिल हैं. मूडीज एनालिटिक्स ने मंगलवार (24 फरवरी 2026) को बयान में कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन जैसे देशों पर इसका प्रभाव पड़ेगा.

अमेरिका ने लगाया 15% ग्लोबल टैरिफ

मूडीज एनालिटिक्स ने कहा, ‘काफी अनिश्चितता है, लेकिन हम कुछ बातें जानते हैं. 15 फीसदी का समान शुल्क उन एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, जिन्हें कहीं अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा है.’ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन के देश-विशिष्ट शुल्क के खिलाफ फैसला दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया. बाद में इसे बढ़ाकर 15 फीसदी करने की भी घोषणा की है. हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है. 

भारत-इंडोनेशिया को लेकर मूडीज का दावा

मूडीज के बयान में कहा गया, ‘अमेरिकी कोर्ट का फैसला भारत और इंडोनेशिया के साथ हाल ही में हुए ट्रेड डील पर भी सवाल उठाता है. भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की समयसीमा और इंडोनेशिया से ड्यूटी फ्री टेक्सटाइल एक्सपोर्ट की मात्रा अभी तय नहीं हुए हैं. भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन भेजने की योजना भी टाल दी है.’ इसमें कहा गया कि कोर्ट के फैसले से अमेरिका की देश-विशिष्ट शुल्क लगाने की शक्ति सीमित होती है, जिससे व्यापार वार्ताओं में उसका दबाव कम होता है. 

इसमें एक महीने से कुछ अधिक समय में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक जैसी उच्च-स्तरीय बातचीत भी शामिल है. बयान में कहा गया, ‘हमारा मानना है कि ट्रंप टैरिफ बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी रास्ते खोजेंगे और हमें आश्चर्य नहीं होगा यदि अमेरिकी शुल्क शुक्रवार से पहले के स्तर के करीब पहुंच जाएं. कुछ सरकारें अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों के अप्रूवल की प्रक्रिया धीमी कर सकती हैं, लेकिन अधिक दंडात्मक शुल्क के डर से उनके पूरी तरह पीछे हटने की संभावना कम है.’ 

कंपनियां मांग सकती है मुआवजा: मूडीज

इसमें कहा गया कि टैरिफ के 20 फरवरी से पहले लागू दर से नीचे स्थिर होने की सर्वोत्तम स्थिति में भी व्यापार में पर्याप्त अनिश्चितता और लॉजिस्टिक अव्यवस्था बनी रहेगी. साथ ही, कंपनियां पहले से चुकाए गए शुल्क के लिए मुआवजा मांग सकती हैं. यह प्रक्रिया काफी विवादास्पद और समय लेने वाली साबित हो सकती है. बयान में कहा गया, ‘यदि अमेरिकी आयातक इस फैसले को अस्थायी राहत मानते हैं तो वे टैरिफ फिर से बढ़ने से पहले सामान भेजने की जल्दबाजी कर सकते हैं.

Input By : पीटीआई भाषा

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