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राष्ट्रपति भवन से हटाई लुटियंस की प्रतिमा, सी राजगोपालाचारी की मूर्ति स्थापित, PM मोदी ने की तारीफ

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राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल कोर्टयार्ड में लगी कांसे की एडविन लुटियंस की मूर्ति को हटाकर आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल सी गोपालाचारी की मूर्ति को स्थापित किया गया है. पीएम मोदी ने 22 फरवरी को लुटियंस की मूर्ति को हटाने की घोषणा करते हुए कहा था कि वो अब वहां नहीं रहेगी. लुटियंस ब्रिटिश आर्किटेक्ट थे, जिन्होंने नई दिल्ली की प्रसिद्ध इमारतों का निर्माण किया था. 

पीएम मोदी ने लुटियंस की मूर्ति हटाने का फैसला करते हुए अपने रेडियो प्रोग्राम के 131वें एपिसोड में रविवार को इसकी घोषणा की थी. पीएम मोदी ने कहा कि आज देश गुलामी की निशानियों को पीछे छोड़ रहा है. भारतीय संस्कृति से जुड़ी निशानियों को महत्व देने लगा है. 

राष्ट्रपति भवन में एक मार्च तक प्रदर्शनी

इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राजगोपालाचारी जिन्हें लोग राजाजी कहकर पुकारते थे, उनकी मूर्ति को स्थापित किया है. अब यहां 1 मार्च तक प्रदर्शनी भी चलेगी. यह मूर्ति राष्ट्रपति भवन के अंदर बड़ी खुली सीढ़ियों के एक कोने में रखी हुई है. राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा है कि यह पहल औपनिवेशिक सोच के निशानों को मिटाने की दिशा में उठाए जा रहे कदम का एक क्रम है. लुटियंस ने उस बिल्डिंग को खुद डिजाइन किया था, जहां से उनकी मूर्ति हटाई जा रही है. 

वहीं पीएम मोदी ने इस कदम की सराहना की है. उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा, ‘यह एक सराहनीय प्रयास है, जो भारत के उन लोगों को सम्मानित करने के संकल्प को दर्शाता है जिन्होंने हमारे भाग्य का निर्माण किया और औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है.’
उन्होंने आगे कहा कि राजाजी एक प्रखर विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और प्रशासक थे. उनका जीवन सत्यनिष्ठा, बुद्धिमत्ता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था. 

कौन थे एडविन लुटियंस ?

लुटियंस को लेकर उनकी बेटी मैरी लुटियंस ने लिखा था कि उनके पिता लंदन के ओन्सलो स्क्वायर और सरे के थर्सली के चार्ल्स और मैरी लुटियंस के 13 लोगों के परिवार में 10वें बच्चे और नौंवे लड़के थे. उनका जन्म 29 मार्च 1869 को हुआ था. उनका नाम एडविन रखा गया. उन्हें नाइट उपाधि भी दी गई है. इसलिए उनके नाम के आगे सर एडविन लुटियंस लगता है. उनके पिता चार्ल्स ऑगस्टस हेनरी लुटियंस एक सैनिक और पेंटर थे. मां मैरी थेरेसा गैलवे आयलैंड से थीं.

लुटियंस ने कुछ आर्किटेक्ट के ऑफिस में अप्रेंटिस के तौर पर काम करना शुरू किया. इसके बाद 1988 में 19 साल की उम्र में अपनी प्रैक्टिस शुरू की. उनकी तुलना क्रिस्टोफर रेन से होती थी. लुटियंस ने कंट्री हाउस का निर्माण किया. लुटियंस को बीसवीं सदी का सबसे महान आर्किटेक्ट माना जाता रहा है. साल 1911 में ब्रिटिश इंडिया की राजधानी कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट करने के बाद किंग जॉर्ज V ने लुटियंस को चीफ आर्किटेक्ट बनाया था. 

इस प्रोजेक्ट को लुटियंस ने अपने साथी आर्किटेक्ट सर हर्बर्ट बेकर के साथ तैयार किया. इसमें वायसराय हाउस (राष्ट्रपति भवन), इंडिया गेट, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, गोल कनॉट प्लेस और उस समय का किंग्सवे नाम का बड़ा सेरेमोनियल एक्सिस बनाया गया. 1944 में उनकी मृत्यु हो गई थी. 

ब्रिटिश राज की निशानियों को हटा रही बीजेपी सरकार

पिछले कुछ सालों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कई फैसले लेते हुए, ब्रिटिश राज की निशानी को गुलामी का प्रतीक मानते हुए हटाने का फैसला किया है. उनमें साल 2022 में राजपथ का नाम बदला और कर्तव्य पथ कर दिया. मई 2023 में पीएम मोदी ने गोल पार्लियामेंट बिल्डिंग के साइड में एक नई पार्लियामेंट की बिल्डिंग बनाकर देश को सौंपी. 2026 में प्राइम मिनिस्टर ऑफिस को कॉलोनियल एरा साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ नाम के एक नए कॉम्पलेक्स में शिफ्ट कर दिया. पीएम मोदी ने ब्रिटिश राज की निशानियों को हटाने के लिए साल 2035 तक की डेडलाइन तय की है. 

कौन थे राजगोपालाचारी? 

लुटियंस की मूर्ति की जगह राजगोपालाचारी या राजाजी की मूर्ति लगाई गई है. वह एक वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे. महात्मा गांधी के सहयोगी थे. बतौर गवर्नर जनरल वह एकलौते भारतीय रहे हैं. इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के विरोध में एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी. 

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