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मैक्रों भारत क्यों आए, क्या है 3.25 लाख करोड़ की डिफेंस डील? जानें F-5 सुपर राफेल कितना ताकतवर

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Rafale Deal: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों चार दिवसीय भारत दौरे पर आ चुके हैं. इमैनुएल मैक्रों आज यानी मंगलवार को मुंबई पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज उनकी मुलाकात और बैठक होगी. दोनों नेताओं की मुलाकात और चर्चा से रक्षा और तकनीक की दुनिया में हलचल मचने वाली है.

इमैनुएल मैक्रों की यह यात्रा मुख्य रूप से भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है. लेकिन इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा राफेल डिफेंस डील है. भारत और फ्रांस के बीच यह डील भारतीय वायुसेना को 114 आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों से लैस करेगी.

पहले कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर की है मदद

भारत और फ्रांस के रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं. 2016 में 36 राफेल जेट्स की पहली डील के बाद दोनों देशों ने कई प्रोजेक्ट्स पर सहयोग किया है, जैसे स्कॉर्पीन पनडुब्बियां. 2026 में यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि चीन की बढ़ती आक्रामकता और पाकिस्तान की हरकतों के बीच भारत अपनी हवाई ताकत को दोगुना करना चाहता है. इमैनुएल मैक्रों भी मानते हैं कि भारत फ्रांस का सबसे बड़ा साझेदार है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत राफेल की ताकत का सबूत दे चुका है. यही कारण है कि इस यात्रा का मुख्य फोकस राफेल डील है. यह डील न केवल रक्षा को मजबूत करेगी बल्कि भारत-फ्रांस साझेदारी की गारंटी भी बनेगी.

भारत-फ्रांस के बीच बड़ी राफेल डील

यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी हथियार खरीद है. रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में इस डील को हरी झंडी दी है. डील के तहत फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे. इनमें से 18 विमान सीधे फ्रांस से ऑफ-द-शेल्फ खरीदेंगे, जबकि बाकी 96 विमान भारत में ही तैयार होंगे. कुल लागत लगभग 30 अरब यूरो यानी 3.25 लाख करोड़ रुपये है. इस डील में विमानों के अलावा रखरखाव, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मिसाइल सिस्टम जैसे स्कैल्प भी शामिल हैं. इस डील से भारतीय वायुसेना की ताकत करीब 50 फीसदी बढ़ जाएगी क्योंकि अभी केवल 36 राफेल हैं.

राफेल डील में एफ-5 वर्जन का महत्व

इस डील में सबसे अहम है राफेल का एफ-5 वर्जन. राफेल एक फ्रेंच मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है जो जल, थल और नभ तीनों जगह कारगर है. इसके अलग-अलग वर्जन हैं जैसे F3, F4 और अब F5. नई डील में F4 और F5 वर्जन शामिल होंगे. इनमें से 24 विमान सुपर राफेल होंगे, जो F-5 वर्जन के प्रोटोटाइप हैं. अभी भारत के पास F-3 वर्जन के राफेल हैं. F-4 और F-5 एडवांस टेक्नोलॉजी और अपग्रेड सिस्टम के साथ आएंगे. F-5 वर्जन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसा माना जा रहा है.

एफ-5 राफेल की खासियत

F5 राफेल में एडवांस्ड सेंसर, स्टील्थ फीचर्स, AI-बेस्ड ऑटोनॉमी और किल-वेब तकनीक होगी. यह कई विमानों को जोड़कर दुश्मन को निशाना बनाएगा. इसके नए इंजन, बेहतर मिसाइलें और ड्रोन इंटीग्रेशन इसे बेहद ताकतवर बनाते हैं. 24 सुपर राफेल F5 के प्रोटोटाइप हैं और फ्रांस इन्हें 2030 तक डिलीवर करेगा. इस डील से भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी मिलेगा, जिससे भविष्य में भारत खुद राफेल जैसे विमान बना सकेगा. यह डील सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि भारत-फ्रांस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को भी मजबूत करेगी.

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