Home Business ‘भारत विविधता में एकता का देश, हम इसे माता मानते हैं…’, गोरखपुर...

‘भारत विविधता में एकता का देश, हम इसे माता मानते हैं…’, गोरखपुर में बोले सरसंघचालक मोहन भागवत

0

Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार (15 फरवरी, 2026) को उत्तर प्रदेश के गोररखपुर में भारत की विविधता में एकता को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि समाज उसे कहते हैं, जिसका परस्पर जुड़ाव हो. अर्थ-स्वार्थ का अपनापन टिकता नहीं है. उन्होंने कहा कि दुनिया के बाकी देशों में ये विचार है कि मनुष्य से मनुष्य का संबंध एक सौदा है, लेकिन अपने देश (भारत) में मनुष्यों के संबंध का विचार ऐसा नहीं है. यहां संबंध अपनेपन का है. हमारे देश में अनेक विविधताएं और अनेक रीति-रिवाज हैं. यहां विविधता में एकता है, क्योंकि यहां एक नाता है कि हम भारत को माता मानते हैं, एक ही चैतन्य सबमें है कि वह भगवान है.

सदियों के आचरण से बना है हमारा स्वभावः मोहन भागवत

RSS गोरक्ष प्रांत की ओर से संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर रविवार (15 फरवरी, 2026) को गोरखपुर जिले में रामगढ़ताल तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथ के प्रमुख व प्रतिनिधि उपस्थित रहे. सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हमारी अलग-अलग विशिष्टताओं के बावजूद यही नाता हमें जोड़े रखती है. हमारी संस्कृति में हम महिला को वात्सल्य की दृष्टि से देखते हैं.

उन्होंने कहा कि सदियों के आचरण से हमारा यह स्वभाव बना है. हमारे यहां अलग रंग-रूप और वेशभूषा अलगाव का कारण नहीं बनते. हमारे समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान है. यही हमारा समान लक्ष्य और समान संस्कृति है. समाज सद्भाव से चलता है, समाज में अगर सद्भावना नहीं है तो कानून और पुलिस के बावजूद समाज नहीं चलता.

भारत स्वार्थ नहीं देखताः सरसंघचालक

सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे हुए हैं. यह कोई उत्सव की बात नहीं है, जिसे करने में 100 वर्ष लग गए, वह और पहले हो जाना चाहिए था. हमें करना यह है कि ब्लॉक स्तर पर साल में दो-तीन बार बैठें. हम अपनी जाति की चिंता कर रहे हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन ध्यान रखें कि हम एक बड़े समाज के लोग हैं.

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है. हम हिंदू समाज के अंग हैं, इस दृष्टि से क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं, इस पर विचार करें. साथ ही अपनी जाति-समाज की बैठक में भी विचार करें कि ब्लॉक स्तर पर हम हिंदू समाज के लिए क्या कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत स्वार्थ नहीं देखता है. दुनिया के अन्य देशों पर संकट आने पर भारत उनकी सहायता के लिए आगे आता है. भारत सद्भावना का केंद्र है.

विभिन्न पंथों के प्रतिनिधियों ने भी रखे विचार

सरसंघचालक मोहन भागवत के संबोधन के बाद विभिन्न जाति, पंथों के प्रतिनिधियों ने भी मौके पर अपने विचार रखे. उनकी जिज्ञासाओं पर सरसंघचालक ने कहा कि जरूरी है कि अपनी जाति-बिरादरी में चर्चा कर बड़े हिंदू समाज के लिए कार्य करें. ब्लॉक स्तर पर बैठकों के बाद धीरे-धीरे बात आगे बढ़ेगी. समाज स्तर पर कार्य स्वयं करना होगा. संघ के भरोसे नहीं रहना चाहिए. समाज के हर अंग में शक्ति होनी चाहिए. समाज को चलाने के लिए खंड स्तर पर समाज के मुखिया लोगों को कार्य करना होगा.

उन्होंने कहा कि मिलकर विचार करेंगे, मिलकर दायित्व लेंगे और कुछ गड़बड़ होगा, तो मिलकर सुधार करेंगे. देश ठीक रहेगा तो हम भी ठीक रहेंगे. यह समाज का काम है, समाज करेगा. संघ सहायता करेगा. सामाजिक सद्भाव बैठक में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने समाज में हो रहे सामाजिक कार्यों के कई प्रेरक उदाहरण भी साझा किए.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version