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महाशिवरात्रि पर दरगाह में मौजूद शिवलिंग की पूजा करेंगे हिंदू श्रद्धालु, कर्नाटक हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार (11 फरवरी, 2026) को अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कलबुर्गी जिले के आलंद टाउन स्थित एक दरगाह में मौजूद शिवलिंग पर महाशिवरात्रि पर पूजा करने की अनुमति दे दी है. सिद्ध रामैया हीरेमठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले साल के तर्ज पर इस साल भी रविवार (15 फरवरी) को सीमित श्रद्धालुओं को पूजा की इजाजत दी है.

दरगाह कमेटी ने हिंदू संगठनों को पूजा की अनुमति न देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. हालांकि, चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि यदि हर ऐसे मामले सुनवाई के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में होने लगेंगे तो यह संदेश जाएगा कि देश के हाई कोर्ट अप्रासंगिक हो गए हैं.

दरगाह कमेटी ने याचिका में लगाया आरोप

दरगाह कमेटी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि अंतरिम आदेशों के जरिए धार्मिक स्थलों का स्वरूप बदलने का एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है. दरअसल, विवाद का केंद्र 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ा स्थल है. दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में बताए जाते हैं. यहीं राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है.

2022 में पूजा करने को लेकर बढ़ा था विवाद

बताया जाता है कि पहले इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग पूजा-अर्चना करते थे. हालांकि, 2022 में पूजा अधिकार को लेकर तनाव बढ़ गया था, जब कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से कथित तौर पर शिवलिंग को अपवित्र करने की घटना सामने आई थी.

फरवरी, 2025 में भी हाई कोर्ट ने 15 हिंदू श्रद्धालुओं को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी. इस दौरान शांतिपूर्ण ढंग से रस्में संपन्न हुई थीं. इस साल भी अदालत ने पूर्व आदेश की तर्ज पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति प्रदान की है.

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