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‘अगर संसद राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा नहीं करेगी तो…’, लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर बोले मनीष तिवारी

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संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सदन में दिए बयान को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्ता पक्ष संसद के दोनों सदनों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथाओं से वाकिफ नहीं है.

उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद अक्टूबर 1947 में संघर्ष के दौरान जब पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर में घुसपैठ की थी, तब देश में संविधान सभा मौजूद थी. उस समय संसद नहीं थी, लेकिन संविधान सभा ने पाकिस्तानी घुसपैठ के संबंध में स्थिति पर उस समय चर्चा की थी.

1962 में संसद में भारत-चीन युद्ध पर हुई चर्चा

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘इसी तरह 1962 में जब चीन के साथ हमारा सीमा युद्ध हुआ था, 7 नवंबर, 1962 से लेकर 16 नवंबर, 1962 तक, जब भारत के उत्तर-पूर्व में जिसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के नाम से जाना जाता है, वहां लड़ाई चल रही थी. तब लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने पूरे एक हफ्ते तक सीमा पर संघर्ष की स्थिति को लेकर चर्चा की थी. उस समय चर्चा में संसद के 165 सदस्यों ने हिस्सा लिया था.’

1965 और 1971 में संसद को दी थी जानकारी

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद 1965 में, पाकिस्तान के साथ मानसून युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने वास्तव में संसद को पाकिस्तान के साथ संघर्ष से संबंधित घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी थी. 1971 में जब बांग्लादेश की आजादी के लिए युद्ध लड़ा जा रहा था, तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसद को पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर हो रहे घटनाक्रमों से अवगत कराया था.’

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में यह तर्क कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती है, यह पूरी तरह से बकवास और खोखला तर्क है और इसलिए यह हर संसदीय परंपरा के खिलाफ है. उन्होंने केंद्र सरकार के सामने सवाल उठाया कि अगर संसद राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा नहीं करेगी, तो कौन सा मंच राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा करेगा?

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