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‘नेपाल-बांग्लादेश की तर्ज पर GenZ को उकसा…’, सोनम वांगचुक गिरफ्तारी मामले में SC में सुनवाई, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को क्या बताया?

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सोनम वांगचुक मामले में केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने आंदोलन के लिए GenZ को उकसाने की कोशिश की थी. यह कोशिश बिल्कुल बांग्लादेश और नेपाल की तर्ज पर की गई थी. कोर्ट में जानकारी देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वांगचुक ने अरब स्प्रिंग आंदोलन का भी जिक्र किया था. यह जानकारी न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायामूर्ति पीवी वराले की पीठ के सामने दी है. 

उन्होंने कोर्ट में बताया कि इस तरह के आंदोलन से कई देश की सरकारें गिर गई थीं. उन्होंने महात्मा गांधी के भाषण का इस्तेमाल अपने असली इरादे छुपाने के लिए किया था. 

सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर चल रही सुनवाई

तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि GenZ शब्द का इस्तेमाल उस जनरेशन के लिए किया जाता है, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है. कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. इसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है. 

मेहता ने कहा कि वांगचुक केंद्र सरकार को वे कहकर संबोधित करते हैं. लद्दाख के लोगों को हम बताते हैं. जनमत संग्रह की मांग करते हैं. यह वही मांगे हैं, जो जम्मू कश्मीर में की जा चुकी हैं. यहां कोई वे या हम नहीं है. बल्कि हम सभी भारतीय हैं. 

लद्दाख चीन-पाकिस्तान की बॉर्डर को साझा करता है: तुषार मेहता

उन्होंने बताया कि लद्दाख एक ऐसा क्षेत्र है, जो दो देशों और चीन-पाकिस्तान के साथ बॉर्डर को साझा करता है. यह इलाका बेहद ही संवेदनशील है. तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि उनके भाषण को समग्र रूप से ध्यान रखना होगा. वे युवाओं को गुमराह कर रहे थे. वे गांधी जी के भाषण का उपयोग कर रहे थे. गांधी जी ने कभी भी अपने देश के खिलाफ नहीं भड़काया. बता दें, वांगचुक वर्तमान में जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं. उनकी पत्नी की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे हैं. 

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