Monday, June 22, 2026
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कौन हैं पूर्व भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे? जिनका राहुल गांधी ने संसद में किया जिक्र तो जमकर हुआ बवाल

बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में अचानक हंगामा हो गया. हंगामा तब हुआ, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए. इस दौरान उन्होंने पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया. इस दौरान उन्होंने एक मैग्जीन के आर्टिकल का हवाला देना चाहा, जिसमें किताब की टाइपस्क्रिप्ट के कुछ अंश थे. 

जनरल नरवणे भारतीय सेना के 28वें प्रमुख नियुक्त हुए थे. उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को जनरल बिपिन रावत से COAS का पदभार संभाला था. इसके बाद वह 15 दिसंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 के चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अस्थायी चेयरमैन रहे थे. ऐसे में हम आपको जनरल नरवणे कू लाइफ से जुड़े फैक्ट्स साझा कर रहे हैं. आइए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं को.

कौन है जनरल नरवणे? 

जनरल नरवणे का पूरा नाम मनोज मुकुंद नरवणे हैं. 22 अप्रैल 1960 को पुणे में उनका जन्म हुआ था. उनके पिता भी भारतीय वायुसेना में अधिकारी रहे हैं. उन्होंने NDA पुणे और इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से अपनी पढ़ाई की है. डिफेंस स्टडीज में उन्होंने एमफिल किया हुआ है. नरवणे को पहली बार जून 1980 को सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला था. 

इसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन (सिखली) के अलावा 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली. नरवणे असम राइफ्लस की कमान भी संभाल चुके हैं. साथ ही उन्होंने कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी अपनी भूमिका निभाई है. 16 दिसंबर 2019 को उन्हें जनरल विपिन रावत का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था. 

उनके संस्मरण के कुछ अंक प्रकाशित होने वाले थे

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक,  2014 में  जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण पर कुछ अंश प्रकाशित होने वाले थे. 2023 में इसे कई न्यूज एजेंसी और कई आउटलेट्स में प्रकाशित किया गया था. कई ईकॉमर्स वेबसाइट ने फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी नाम की किताब के प्री ऑर्डर लिए थे. इसे पेंगुइन द्वारा प्रकाशित किया जाना था, लेकिन इस किताब को सरकार की अनुमति नहीं दी गई थी. किताब को सरकारी अनुमतियों के कारण रोक दिया गया था. यह उनका अप्रकाशित एक मेमोयर (memoir) है.

इस किताब के साथ दिए गए मार्केटिंग टेक्स्ट में लिखा था, ‘2019 में जनरल मनोज मकुंद नरवणे भारतीय सेना के प्रमुख बने. भारतीय सशसत्र बलों के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का उनका सफर रोमांचक और चुनौतियों पूर्ण घटनाओं से भरा था.’ 

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