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Indigo Crisis: उड़ानें बचाने के चक्कर में सुरक्षा से समझौता ? DGCA की छूट पर हाई कोर्ट नाराज

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दिल्ली हाई कोर्ट ने विमानन नियामक संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से पायलटों के साप्ताहिक आराम और छुट्टी से जुड़े नियमों में दी गई अनिश्चितकालीन छूट पर सख्त सवाल किए. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों को ऐसे ही हल्के में नहीं लिया जा सकता.

दिल्ली HC ने DGCA से पूछा अहम सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान DGCA से पूछा कि नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के उस अहम प्रावधान को क्यों वापस लिया गया, जिसमें साफ कहा गया था कि पायलटों की साप्ताहिक छुट्टी को उनकी लीव से बदला नहीं जा सकता. 

इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने DGCA और इंडिगो एयरलाइंस को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. दरअसल, DGCA ने 5 दिसंबर 2025 को इंडिगो को कुछ FDTL नियमों से छूट दी थी. इसका मकसद उड़ानों में हो रही भारी कटौती को रोकना और परिचालन को सामान्य करना बताया गया. नवंबर 2025 से नए नियम लागू होने के बाद इंडिगो सैकड़ों उड़ानें रद्द करने को मजबूर हुई थी. क्योंकि वह नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए तैयार नहीं थी.

नियमों के लागू होने के बाद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है – DGCA 

दिल्ली हाई कोर्ट में DGCA के वकील ने कोर्ट को बताया कि नए नियमों के लागू होने के बाद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. एयरलाइंस की ओर से यह शिकायत आई थी कि पायलट साप्ताहिक आराम को छुट्टी के साथ जोड़ रहे हैं. DGCA ने यह भी साफ किया कि साप्ताहिक आराम अब भी अनिवार्य है, जबकि लीव पायलट और एयरलाइन के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करती है.

DGCA ने नियमों को सही से नहीं किया लागू – याचिकाकर्ता

हालांकि कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि जब उसी दिन रात की ड्यूटी से जुड़े नियमों में दी गई छूट फरवरी 2026 तक सीमित है, तो फिर साप्ताहिक आराम और लीव से जुड़ी छूट की कोई समय-सीमा क्यों नहीं रखी गई. कोर्ट ने कहा कि यह छूट सिर्फ एक एयरलाइन की परेशानी के कारण सभी पर लागू कर दी गई है, जो गंभीर चिंता का विषय है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि DGCA ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन  के नियमों की अनदेखी की और थकान से बचाव के नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी.

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