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‘जो सनातन धर्म के मानने वालों को…’, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गांधी नगर में दिया बड़ा बयान, जानें सरकार को लेकर क्या कहा

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को देश में सनातन धर्म के मूल्यों और उसके प्रति सरकार की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को कायम रखने में विफल रहती है, वह कभी सत्ता में वापस नहीं आएगी.

दरअसल, गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय की एक सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि विभिन्न सनातन परंपराओं के अनुयायी देश की आजादी के बाद लंबे समय तक इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि उन्हें ऐसी सरकार मिलेगी, जो सनातन धर्म को उचित महत्व देगी और इसके सिद्धांतों के अनुसार शासन करेगी. उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि संतों के आशीर्वाद से, सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करने वाली कोई भी सरकार इस देश में फिर कभी सत्ता में नहीं आएगी.’

शिक्षापत्री के 200 साल पूर्ण होने पर बोले अमित शाह

यह आयोजन भगवान स्वामीनारायण की ओर से 1826 में लिखित 212 संस्कृत श्लोकों वाली पवित्र आचार संहिता शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था. यह स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायियों के लिए एक मूलभूत मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है, जिसमें अहिंसा, पवित्रता, आहार और दैनिक कर्तव्यों सहित नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों की रूपरेखा दी गई है. शाह ने कहा कि गुजरात के बेटे नरेंद्र मोदी पिछले 11 सालों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भगवान राम के उस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है, जो 550 साल से भी अधिक समय पहले नष्ट कर दिया गया था, जिससे सदियों से इस क्षण का इंतजार कर रहे लोगों की इच्छा पूरी हुई है.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 11 सालों में मोदी सरकार की ओर से लिए गए विभिन्न फैसले भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया और तीन तलाक को समाप्त कर दिया गया. इन 11 सालों में योग, आयुर्वेद, गौ संरक्षण और बद्रीनाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और अब सोमनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है.’

स्वामीनारायण ने गुजरात में बसने से पहले पूरे भारत की यात्रा की- शाह

उन्होंने गुजरात और भारतीय समाज में भगवान स्वामीनारायण के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वह ब्रिटिश काल के दौरान एक मार्गदर्शक शक्ति थे. गांधीनगर से सांसद अमित शाह ने कहा, ‘भगवान स्वामीनारायण ने गुजरात में बसने से पहले पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की. ऐसे समय में जब समाज कई बुराइयों और व्यसनों से ग्रस्त था, उन्होंने समुदाय को संगठित करने और सुधारने के लिए काम किया.’

भगवान स्वामीनारायण की ओर से रचित शिक्षापत्री के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि इसमें प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों का सार समाहित है. उन्होंने कहा, ‘यह जीवन के लिए एक नैतिक संविधान की तरह है. यह आत्म-अनुशासन, सामाजिक आचरण, करुणा, अहिंसा और कर्तव्यबोध पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है.’

शिक्षापत्री का महत्व आज भी प्रासंगिक- शाह

शाह ने कहा कि यह पाठ आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि यह लोगों को विवादों से बचने के लिए वित्तीय लेन-देन और व्यक्तिगत आचरण में पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह देता है. भगवान स्वामीनारायण ने लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करके, पशु बलि का विरोध करके और जातिवाद और अस्पृश्यता के खिलाफ अभियान चलाकर सामाजिक सुधारों की पुरजोर सिफारिश की थी.

उन्होंने कहा कि स्वामीनारायण संप्रदाय अपनी स्थापना के बाद से ही सनातन मूल्यों की रक्षा और समाज के उत्थान की दिशा में काम कर रहा है. सभी का कल्याण ही शिक्षापत्री का सार है. भगवान स्वामीनारायण ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया और लोगों में अनुशासन का संचार किया.

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