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उत्तराखंड में गैर हिंदुओं पर धार्मिक स्थलों पर लगेगी रोक, मौलाना अरशद मदनी का आया रिएक्शन, जानें क्या बोले?

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उत्तराखंड में गैर हिंदुओं के धार्मिक स्थलों में घुसने पर रोक लगाने के फैसले के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि उन्हें लगता है कि देश उनका है और वे जनता को किसी भी दिशा में ले जा सकते हैं लेकिन समय बदल गया है.

उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि लोग प्यार और भाईचारे से रहें और जमीयत उलेमा-ए-हिंद यही सिखाता है. यह सिर्फ केदारनाथ में नहीं है. असम में पूरी कॉलोनियों को तोड़ा जा रहा है और लाखों मुसलमानों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है.

क्या है पूरा मामला

पूरा मामला उत्तराखंड में स्थित हिंदू धार्मिक स्थलों पर रोक लगाने को लेकर है. इस फैसले के बाद बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किया जाएगा. हालांकि चार धामों में से एक यमुनोत्री समिति ने इस पर फैसला नहीं लिया है. इसी पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने बयान दिया है. 

मंदिर समिति ने बनाई आपसी सहमति

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने इस पर आपसी सहमति बना ली है. बोर्ड मीटिंग में इस पर फैसला लिया जाएगा. वहीं, गंगोत्री मंदिर समिति ने इस पर फैसला ले लिया है. 

मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंंत द्विवेदी ने क्या बताया? 

पीटीआई न्यूज एजेंसी को बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने का मामला साधु संतो, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय निवासियों समेत सभी हितधारकों के साथ सहमति बना लगी गई है. उन्होंने इस प्रस्ताव पर मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में औपचारिक मोहर लगने की बात कही है. जिसके बाद यह नियम बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों में लागू हो जाएगा. 

कानूनी रूप से धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार: मंदिर समिति अध्यक्ष

उन्होंने कानून का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 26 प्रत्येक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है. बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम कोई पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है. साथ ही कहा है कि सनातन धर्म में विश्वास रखने वालों का स्वागत है. 

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