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Shashi Tharoor: आपने कांग्रेस की कई अहम बैठकों में हिस्सा क्यों नहीं लिया? सांसद शशि थरूर ने दिया ये जवाब

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने शनिवार (24 जनवरी, 2026) को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की एक अहम बैठक में अपनी गैर-मौजूदगी को लेकर चल रही अटकलों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इन अटकलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से साफ इनकार करते हुए कहा कि इस मामले पर पहले ही काफी चर्चा हो चुकी है. अगर अब और कोई बात है तो वह सीधे पार्टी नेतृत्व के सामने रखी जाएगी.

इन मुद्दों को मुझे पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना हैः थरूर

केरल के कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल (KLF) में बोलते हुए तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी सार्वजनिक मंच पर पार्टी के आंतरिक मामलों की चर्चा नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं यहां कोई राजनीतिक घोषणा करने नहीं आया हूं. यह एक साहित्यिक उत्सव है. ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपनी पार्टी के नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर.’

उन्होंने कहा कि वह संसद के सत्र के लिए दिल्ली जाएंगे, जहां उन्हें पार्टी नेतृत्व के साथ उचित और व्यवस्थित बातचीत का मौका मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले 17 सालों से कांग्रेस पार्टी में हूं. जो भी गलत हुआ है, उसके लिए बात करने की जरूरत है और वह सही मंच पर ही किया जाएगा.’

पार्टी नेतृत्व को पहले ही दी थी मौजूद न होने की जानकारीः थरूर

थरूर ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि वे बैठक में शामिल न होने को लेकर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं और अब इस मामले में पर सार्वजनिक रूप से कोई और सफाई नहीं देंगे. उन्होंने कहा, ‘इस मुद्दे को मीडिया में पर्याप्त रूप से कवर किया जा चुका है. कुछ रिपोर्ट सही हो सकती हैं और कुछ नहीं. मैं सार्वजनिक रूप से अपने कारणों को स्पष्ट नहीं करूंगा.’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपनी गैर-मौजूदगी की जानकारी उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी.

ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख को लेकर बोले शशि थरूर

इसके अलावा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर पर उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने संसद में अपनी राय व्यक्त करने को लेकर किसी भी तरह के पछतावे से इनकार करते हुए यह भी खारिज किया कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ कोई कदम उठाया हो. उन्होंने कहा कि अपने पूरे संसदीय करियर में उन्होंने कभी कांग्रेस के आधिकारिक रुख के विपरीत कोई स्थिति नहीं अपनाई. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उनका मतभेद सैद्धांतिक था, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताया, न कि दलगत राजनीति का.

थरूर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित की भावना के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए. पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिखे गए अपने एक लेख का जिक्र करते हुए थरूर ने दोहराया कि ऐसे हमलों को बिना जवाब नहीं छोड़ा जाना चाहिए और भारत को कड़े कदम उठाने का अधिकार है.

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