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मौलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी को नोटिस…MLA अकबरुद्दीन ओवैसी ने सरकार को दी चेतावनी

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एआईएमआईएम (AIMIM) के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना सरकार की तरफ से विश्वविद्यालयों की खाली जमीनों  को वापस करने की नोटिस के खिलाफ विधानसभा में अपनी आवाज बुलंद की है. इस बार उनका निशाना सरकार की उस योजना पर था, जिसमें वह शिक्षण संस्थानों की खाली पड़ी जमीन को अधिग्रहित करने की कोशिश कर रही है. ओवैसी ने सरकार को चेतावनी दी कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का हस्तक्षेप राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

हाल ही में तेलंगाना सरकार ने गच्चीबोली (Gachibowli) इलाके में स्थित विभिन्न संस्थानों की अतिरिक्त या उपयोग में न आने वाली जमीन को वापस लेने के लिए नोटिस जारी किए हैं. ओवैसी ने सदन में दस्तावेज लहराते हुए बताया कि इनमें मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं. ओवैसी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थानों के पास भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए ज़मीन का होना आवश्यक है. उन्होंने सरकार से सवाल किया, ‘अगर आप सभी शिक्षण संस्थानों की जमीन वापस ले लेंगे, तो भविष्य में इन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का विस्तार कैसे होगा?’

उर्दू यूनिवर्सिटी का मुद्दा 
ओवैसी ने विशेष रूप से उर्दू यूनिवर्सिटी की जमीन का मुद्दा उठाया, जो हैदराबाद की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने बताया कि ISB जैसी संस्था को भी सरकार ने नोटिस थमा दिया है, जो राज्य के वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में उभरने की राह में रोड़ा बन सकता है.

शिक्षा बनाम अधिग्रहण की जंग
विशेषज्ञों का मानना है कि गच्चीबोली जैसे प्राइम लोकेशन पर जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे सरकार पर इन जमीनों को व्यावसायिक उपयोग में लाने का दबाव हो सकता है. हालांकि, ओवैसी का तर्क है कि शिक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए आवंटित जमीन का किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी ओवैसी के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार से अपनी योजना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है.

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