Home Business SC का अहम फैसला, सरकारी नौकरी में चयन की मेरिट पर बने...

SC का अहम फैसला, सरकारी नौकरी में चयन की मेरिट पर बने लिस्ट, अच्छे अंक पाने वाले रिजर्व्ड कैटेगरी कैंडिडेट को GEN में मिले जगह

0

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में अच्छे अंक पाने वाले एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी की लिस्ट में जगह पाने के हकदार हैं. कोर्ट ने साफ किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी की सीटें किसी खास सामाजिक वर्ग के लिए नहीं होतीं. यह सभी के लिए खुली हैं. उन्हें मेरिट के आधार पर ही भरा जाना चाहिए.

2021 में सौरभ यादव बनाम यूपी सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि मेरिट के आधार पर आरक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी सामान्य कोटे से नौकरी पा सकता है. इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए कोर्ट ने अब साफ किया है कि चयन प्रक्रिया के शुरुआती चरण में भी मेरिट आधारित लिस्ट जारी होनी चाहिए.

फैसले को सरल भाषा में इस तरह से समझा जा सकता है :-

  • अगर आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने शुरुआती चरण में सामान्य वर्ग के लिए तय कट ऑफ से ज्यादा अंक पाए हैं, तो उसे सामान्य लिस्ट में जगह मिलेगी
  • अगर वह आगे के चरण में भी अधिक अंक पाता है, तो वह सामान्य लिस्ट से नौकरी पा सकता है.
  • अगर आगे के चरण में वह कम अंक पाता है तो उसे वापस आरक्षित श्रेणी में जगह मिल सकती है.

जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा है कि अच्छे अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उनकी श्रेणी के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए. यह सामाजिक न्याय की अवधारणा के विरुद्ध होगा. यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट, राजस्थान की जिला अदालतों और न्यायिक अकादमी में जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के कुल 2,756 पदों की चयन प्रक्रिया से जुड़ा है. 2023 में हुई यह प्रक्रिया दो चरणों में थी-पहला चरण 300 अंकों की लिखित परीक्षा, और दूसरा चरण 100 अंकों की कंप्यूटर आधारित टाइपिंग परीक्षा थी.

मई 2023 में लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद भर्ती आयोग ने टाइपिंग टेस्ट के लिए सूची तैयार की. सामान्य श्रेणी के लिए कट ऑफ लगभग 196 अंक रहा, जबकि कई आरक्षित श्रेणियों में कट ऑफ इससे काफी अधिक था. कुछ मामलों में तो यह 220 से भी ऊपर था. इसके चलते आरक्षित वर्ग के कई ऐसे उम्मीदवार प्रारंभिक चयन सूची में जगह नहीं बना पाए, जिन्होंने सामान्य वर्ग की कट ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे.

अपनी श्रेणी के ऊंचे कट ऑफ के चलते इन अभ्यर्थियों को टाइपिंग टेस्ट में बैठने का अवसर नहीं मिला. मामला राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा. वहां की डिवीजन बेंच ने कहा कि श्रेणीवार शॉर्टलिस्टिंग गलत है. हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद अनुच्छेद 16(4) वंचित तबके के लिए आरक्षण की अनुमति देता है. मनमाने तरीके से वर्गीकरण इसके असल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाएगा.

अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को दोहरा लाभ मिलने की दलील को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कोई उम्मीदवार तभी आरक्षण का लाभ लेता है, जब उसे कम क्वालीफाइंग मार्क्स या आयु में छूट जैसे लाभ मिलें. केवल आरक्षित वर्ग का सदस्य होना अपने-आप में आरक्षण का लाभ लेना नहीं माना जा सकता.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version