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‘रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं’, कर्नाटक की सत्ता में सबसे लंबे कार्यकाल के करीब पहुंचने पर सिद्धारमैया ने कोहली-सचिन का दिया उदाहरण

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया बुधवार (7 जनवरी, 2026) को राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोडने वाले हैं. उन्होंने सोमवार (5 जनवरी, 2026) को इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय जनता के आशीर्वाद को दिया. इस दौरान उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को लेकर क्रिकेटर विराट कोहली और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए बड़ा बयान भी दिया. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड टूटन के लिए ही बनते हैं. उर्स ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में 7 साल और 239 दिन सेवा की थी.

वहीं, सिद्धरमैया बुधवार (7 जनवरी) को अपने मुख्यमंत्री पद पर 7 साल और 240 दिन पूरे कर लेंगे, जो उर्स की अवधि को पार कर जाएगा. उनके और उर्स के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर को उजागर करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि जहां उर्स शासक वर्ग से संबंधित थे, वहीं वह सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय (कुरुबा या चरवाहा) से आते हैं.

गर्व की बात है कि मैं और उर्स दोनों मैसुरु से हैं- सिद्धारमैया

सीएम सिद्धारमैया ने मैसुरु में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘जनता के आशीर्वाद से कल मंगलवार (6 जनवरी को) कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे दिवंगत डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड टूट जाएगा. गर्व की बात है कि मैं और उर्स दोनों मैसूरु से हैं.’

उर्स के रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा कि रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं. उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए अपनी इस उपलब्धि की तुलना विराट कोहली की ओर से क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने से की.

मैंने तो मंत्री बनने की भी कल्पना नहीं की थी- सिद्धारमैया

यह पूछने पर कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वह यह रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे तो सिद्धरमैया ने स्वीकार किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनना तो दूर, मंत्री बनने की भी कल्पना नहीं की थी. उन्होंने कहा, ‘मैंने तो बस यही सोचा था कि तालुक बोर्ड सदस्य बनने के बाद मैं विधायक बनूंगा. मैं अब तक आठ चुनाव जीत चुका हूं. मैं दो संसदीय चुनाव और दो विधानसभा चुनाव हार चुका हूं. अपने जीवन में मैंने तालुक चुनावों सहित कुल 13 चुनाव लड़े हैं.’

मेरी और उर्स की कोई तुलना नहीं है- सिद्धारमैया

उन्होंने उर्स से उनकी तुलना के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘देवराज उर्स सामाजिक रूप से पिछड़े नहीं थे. वास्तव में, वह शासक वर्ग से थे. वह उस समुदाय से थे जिसकी आबादी ज्यादा नहीं थी, लेकिन वह एक लोकप्रिय नेता थे.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी और उर्स की कोई तुलना नहीं है. उर्स का दौर वर्तमान से भिन्न था और देवराज उर्स ने सीधे जनता से धन इकट्ठा कर चुनाव लड़ा था. उन्होंने कहा, ‘साल 1962 में लोगों ने उन्हें धन दिया और उनके पक्ष में मतदान किया. अब समय बदल गया है.

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