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फोन टैपिंग केस में पूर्व मंत्री हरीश राव को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की तेलंगाना सरकार की याचिका

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तेलंगाना के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव के लिए फोन टैपिंग मामले में बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकार ने हरीश राव से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राज्य सरकार के इरादों पर पानी फेर दिया है और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है.

दरअसल, फोन टैपिंग केस की जांच के सिलसिले में तेलंगाना सरकार हरीश राव को तलब करना चाहती थी. इसके लिए सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. तेलंगाना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करते हुए हरीश राव से पूछताछ की इजाजत मांगी थी.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सोमवार (5 जनवरी, 2026) को सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार की दलीलों को संतोषजनक नहीं पाया. अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में कोई दखलअंदाजी की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से दायर एसएलपी को खारिज कर दिया, जिसे राज्य सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है.

यह फैसला उस समय आया है जब तेलंगाना की राजनीति में इस मामले को लेकर काफी हलचल थी. पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए फोन टैपिंग की जांच वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल थी. सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ दर्शाता है कि विधायिका और कार्यपालिका के बीच न्यायपालिका अपना संतुलन बनाए हुए है और बिना ठोस आधार के किसी व्यक्ति को जांच के दायरे में लाने के खिलाफ वह कड़ा रुख अपना सकती है.

हरीश राव के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब तकनीकी रूप से उन पर से सीधे पूछताछ का खतरा टल गया है. जानकारों का मानना है कि अदालत के इस रुख से जांच एजेंसियों के तेवर भी काफी हद तक कमजोर पड़ सकते हैं. फिलहाल, तेलंगाना सरकार अगले कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उनके लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है.

 

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