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भारत-पाकिस्तान ने एक-दूसरे को सौंपी न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट, नए साल पर क्यों किया ऐसा?

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भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार (1 जनवरी 2026) को राजनयिक चैनलों के माध्यम से परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की सूची का आदान-प्रदान किया. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच यह आदान-प्रदान एक समझौते के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकना है.

भारत-पाक ने एक-दूसरे को सौंपी न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट

भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों और फैसिलिटीज के आदान-प्रदान को लेकर 31 दिसंबर 1988 को समझौता हुआ था, जिसे 27 जनवरी 1991 को लागू किया गया था. इस समझौते के तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी एक दूसरे से शेयर करते हैं. दोनों देशों के बीच यह परमाणु प्रतिष्ठानों का लगातार 34वां आदान प्रदान है.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि कांसुलर एक्सेस 2008 पर द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक चैनलों के जरिए एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की लिस्ट का भी आदान-प्रदान किया गया. इस समझौते के अनुसार, हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को ऐसी सूचियों का आदान-प्रदान किया जाता है.

दोनों देशों ने कैदियों की सूची का भी किया आदान-प्रदान

भारत ने अपनी हिरासत में बंद 391 सिविल कैदियों और 33 मछुआरों की लिस्ट दी, जो पाकिस्तानी हैं या जिन्हें पाकिस्तानी माना जाता है. इसी तरह, पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में बंद 58 सिविल कैदियों और 199 मछुआरों की डिटेल्स वाली लिस्ट दी, जो भारतीय हैं या जिन्हें भारतीय माना जाता है. भारत सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत से सिविल कैदियों, मछुआरों और उनकी नावों और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों की जल्द रिहाई और वापसी की भी मांग की है. पाकिस्तान से उन 167 भारतीय मछुआरों और सिविल कैदियों की रिहाई और वापसी में भी तेजी लाने की अपील की गई है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है.

भारतीय कैदियों की सुरक्षा को लेकर MEA ने क्या कहा?

इसके अलावा, पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अपनी कस्टडी में बंद 35 सिविल कैदियों और मछुआरों को तुरंत कांसुलर एक्सेस दे, जिनके बारे में माना जाता है कि वे भारतीय हैं और जिन्हें अब तक कांसुलर एक्सेस नहीं दिया गया है. भारत ने ये भी कहा कि कैदियों और मछुआरों की रिहाई तक पाकिस्तान को उनकी सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करनी चाहिए.

भारत सरकार की लगातार कोशिशों की वजह से, 2014 से अब तक 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 भारतीय सिविल कैदियों को पाकिस्तान से वापस लाया गया है. इसमें 500 भारतीय मछुआरे और 13 भारतीय सिविल कैदी शामिल हैं जिन्हें 2023 से अब तक पाकिस्तान से वापस लाया गया है. (इनपुट एजेंसी के साथ)

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