Monday, March 9, 2026
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ईरान-इजरायल युद्ध ने तोड़ी व्यापारियों की कमर, JNPT पोर्ट पर हजारों कंटेनर फंसे, आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित

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ईरान-इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के कारण भारत के निर्यात-आयात और खासकर महाराष्ट्र के कृषि निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है. दुबई के जेबेल अली पोर्ट जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों पर जहाजों की आवाजाही रुकने से हजारों टन कृषि उत्पाद फंस गए हैं और किसानों-व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है.

मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध ने भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और बंदरगाहों के संचालन पर असर पड़ने से भारत से भेजे गए कृषि उत्पाद, चावल, फल, मसाले और अन्य सामान बड़ी मात्रा में बंदरगाहों पर फंस गए हैं. इसका सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र के किसानों और निर्यातकों पर पड़ रहा है.

JNPT पर फंसे हैं 1,200 से ज्यादा कंटेनर

नवी मुंबई के JNPT (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट) पर खाड़ी देशों और खाड़ी देशों से होकर यूरोप जाने वाले 1,200 से अधिक कंटेनर जेएनपीटी पोस्ट पर फसें हैं. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) पर लगभग 80 कंटेनर अंगूर दुबई के लिए लोड नहीं हो पाए. 200 से ज्यादा कंटेनर नासिक से भेजे गए, लेकिन पोर्ट के बाहर ही रुक गए. मध्य-पूर्व संकट के कारण भारत का करीब 4 लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों या रास्ते में फंस गया है.

इसी तरह दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर भारत से भेजे गए लगभग 800 से 1,000 कंटेनर फंस गए हैं. इन कंटेनरों में मुख्य रूप से अंगूर, केले, अनार, तरबूज, प्याज और अन्य हरी सब्जियां शामिल हैं. महाराष्ट्र से खाड़ी देशों को बड़ी मात्रा में फल-सब्जियों का निर्यात होता है. युद्ध शुरू होने के बाद से कई शिपिंग कंपनियों ने जहाज भेजना बंद कर दिया है या देरी हो रही है.

भारत के निर्यात पर कितना असर पड़ा?

भारत के निर्यात पर असर कैसा पड़ा है, इसे समझने के लिए एबीपी न्यूज के संवाददाता मृत्युंजय सिंह नवी मुंबई के APMC मार्केट के बालाजी एक्सपोर्ट पहुंचे, जहां एक्सपोर्ट व्यापारी किशन भाटिया ने बातचीत में कहा कि भारत से कई कंटेनर मिर्ची दुबई के लिए रवाना होना था, पर JNPT पोर्ट पर 8 दिन पड़ा रहा और आज सोमवार (9 मार्च, 2026) को वापस लोकल मार्केट में लाकर आधी कीमत पर बेचना पड़ रहा है. कई निर्यातकों को मजबूरन अपना माल वापस बुलाना पड़ रहा है. कई कंटेनर JNPT से वापस मंगवाए जा रहे हैं. खराब होने से बचाने के लिए फल-सब्जियां अब घरेलू बाजार में नुकसान सहकर कम कीमत पर बेची जा रही हैं.

भारत के आयात पर कितना असर पड़ा?

युद्ध का असर सिर्फ निर्यात पर ही नहीं, बल्कि आयात पर भी पड़ रहा है. ईरान और खाड़ी देशों से आने वाले 600 से 700 कंटेनर भारत के लिए रास्ते में या दुबई के जबेल अली पोर्ट पर फंसे हुए हैं. इनमें मुख्य रूप से सेब, कीवी, खजूर, सूखे मेवे शामिल हैं. व्यापारियों के मुताबिक, एक कीवी का कंटेनर लगभग 30–32 लाख रुपये का होता है. खजूर का कंटेनर करीब 45 लाख रुपये का होता है.

आयात पर पड़े युद्ध के असर को समझने के लिए संवाददाता मृत्युंजय सिंह APMC मार्केट में मीत इंटरनेशनल इंपोर्ट के मालिक विजय भाटिया से मिले. विजय भाटिया ने कहा कि युद्ध के पहले यूरोप से सेब से भरे कंटेनर जो भारत के लिए एक्सपोर्ट हुए थे, वो JNPT पोर्ट होकर मुंबई के मार्केट के आ गए, लेकिन अब अगली खेप कंटेनर में फंसी है.

उन्होंने कहा कि इंपोर्ट व्यापारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है. खराब हो रहे वस्तुओं पर कोई इन्शुरेंस भी लागू नहीं हो रहा है. जहाज का खर्च और बीमा भी महंगा हो गया है. युद्ध क्षेत्र के कारण शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं. समुद्री बीमा महंगा हो गया है और कई जहाज मार्ग बदल रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने भारत के कृषि निर्यात तंत्र को झटका दिया है. इसका सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र के किसानों, फल-सब्जी निर्यातकों और व्यापारियों पर पड़ रहा है. अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो कृषि व्यापार, शिपिंग लागत और घरेलू कीमतों पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है.

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