हैदराबाद में रविवार (1 मार्च 2026) को उस वक्त सड़कें गुस्से और गम से भर गईं, जब AIMIM के नाम्पल्ली विधानसभा क्षेत्र के विधायक माजिद हुसैन और MLC रियाज उल हसन अफंदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए निकल पड़े. यह प्रदर्शन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की उस मौत के विरोध में था, जो अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई. यह हमला कायराना और अमानवीय है यही आवाज पूरे जलसे में गूंजती रही.
पश्चिम एशिया में जो आग भड़की, उसकी लपटें हैदराबाद की गलियों तक महसूस हुईं. इजरायल ने अमेरिकी साझेदारी में ईरान पर व्यापक हवाई हमले किए, जिसमें 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. इजरायली सेना ने तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में शीर्ष अधिकारियों के ठिकानों के साथ-साथ मिसाइल-लॉन्चर स्थलों को भी निशाना बनाया. इन्हीं हमलों में ईरानी राज्य मीडिया ने ख़ामेनई की मौत की पुष्टि की, साथ ही उनकी बेटी, नातिन, दामाद और बेटी की मौत की भी खबर दी. इस घटना ने पूरे मुस्लिम जगत को हिलाकर रख दिया.
AIMIM विधायक ने विरोध प्रदर्शन में लिया भाग
हैदराबाद में हुए इस विरोध प्रदर्शन में AIMIM विधायक माजिद हुसैन और MLC मिर्ज़ा रियाज उल हसन अफंदी ने खुलकर अपनी बात रखी. दोनों नेताओं ने अमेरिका और इजरायल को सीधे तौर पर आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहराया और ख़ामेनई की मौत को एक राजनीतिक हत्या बताया. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका मुर्दाबाद और इजरायल मुर्दाबाद के नारे बुलंद किए. हैदराबाद में हुए प्रदर्शनों में बड़ी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया और इज़रायल तथा अमेरिकी ताकतों के खिलाफ नारे लगाए.
हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने की निंदा
AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस हमले की कड़ी भर्त्सना की. ओवैसी ने कहा कि जिस वक्त जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता चल रही थी, उसी दौरान यह हमला किया गया यह बेहद कायराना और अमानवीय है. उन्होंने यह भी चेताया कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
कौन थे अयातुल्लाह खामनेई?
अयातुल्लाह खामनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर थे और उन्होंने 36 साल तक देश को नेतृत्व दिया. वे पश्चिमी प्रभाव के सतत विरोधी थे. उनके जाने से न केवल ईरान बल्कि पूरे शिया जगत में शोक की लहर है. ईरान ने 40 दिनों के सार्वजनिक शोक की घोषणा की है और अमेरिकी ठिकानों व इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की प्रतिज्ञा ली है. माजिद हुसैन और रियाज उल हसन अफंदी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन एक राजनीतिक बयान से कहीं अधिक, उन लाखों लोगों की तकलीफ की अभिव्यक्ति था, जो मानते हैं कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं बल्कि एक नई तबाही की शुरुआत है.



