Saturday, February 21, 2026
spot_img
HomeBusinessभारत में ही बनेंगे राफेल फाइटर जेट, रक्षा मंत्रालय ने कसी कमर,...

भारत में ही बनेंगे राफेल फाइटर जेट, रक्षा मंत्रालय ने कसी कमर, CCS को भेजा जाएगा नोट, कब तक शुरू हो जाएगा काम?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दौरे (16-19 फरवरी) के बाद मेक इन इंडिया राफेल डील में तेजी आई है. सौदे को लेकर रक्षा मंत्रालय से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि अगले 4-6 महीने में डील पर साइन किए जा सकें.

रक्षा मंत्रालय के टॉप सूत्रों के मुताबिक, राफेल के साथ-साथ दूसरे हथियारों की खरीद प्रक्रिया की टाइमलाइन को छोटा किया जाएगा ताकि जल्द से जल्द लड़ाकू विमान और दूसरे हथियार मुहैया हो सकें. अभी किसी भी हथियार को दूसरे देश से खरीदने की प्रक्रिया बेहद लंबी है जिसमें काफी वक्त लग जाता है.

DAC ने IAF को दी थी लड़ाकू विमान बनाने की मंजूरी

मैक्रों के दौरे से पहले, रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्युजेशन काउंसिल (DAC) ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान देश में बनाने की मंजूरी दी थी. राफेल को फ्रांस की दासो (दसॉल्ट) कंपनी बनाती है. ऐसे में दासो कंपनी किसी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर देश में राफेल का नया प्लांट स्थापित कर सकती है.

माना जा रहा है कि टाटा कंपनी के साथ, दासो ये करार कर सकती है क्योंकि, दोनों कंपनियां पहले से हैदराबाद में एक साथ मिलकर राफेल के कुछ एयरफ्रेम तैयार करती हैं. ऐसे में बहुत हद तक संभव है कि ये प्लांट हैदराबाद या फिर नागपुर में लगाया जा सकता है क्योंकि दासो कंपनी का पहले से नागपुर में एक एविएशन प्लांट है.

डीएसी के बाद सौदे के प्रस्ताव को सीसीएस और वित्त मंत्रालय भेजा जाता है. उसके बाद ही फ्रांस से सौदा होने की संभावना है. भारतीय वायुसेना को मेक इन इंडिया राफेल, वर्ष 2029 तक मिल पाएगा. ऐसे में बहुत हद तक संभव है कि 114 में से 16 विमानों को सीधे दासो कंपनी से खरीद लिया जाएगा.

भारत ने 2016 में फ्रांस से 36 राफेल खरीदने का किया था सौदा

वर्ष 2016 में भारत ने फ्रांस से सीधे 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया था, उसकी कुल कीमत करीब 59 हजार करोड़ थी. पिछले वर्ष अप्रैल में भारत ने नौसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमानों के मरीन वर्जन यानी राफेल (एम) खरीदने को लेकर करार किया था. इन राफेल (एम) लड़ाकू विमानों को स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा.

भारतीय वायुसेना ने घटती स्क्वाड्रन के मद्देनजर 114 राफेल (राफेल) फाइटर जेट देश में बनाने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा था. पिछली राफेल डील की तरह ये सौदा भी जीटूजी यानी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट करार करेगा. करार होने के बाद राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दासो (दसॉल्ट), भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ देश (भारत में) ही एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी. भारत में बनने वाले स्वदेशी राफेल फाइटर जेट में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी हथियार और उपकरण लगे होंगे.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय वायुसेना के मौजूदा राफेल फाइटर जेट की ऑपरेशन्ल क्षमताओं को देखते हुए मेक इन इंडिया के तहत फ्रांसीसी लड़ाकू विमान बनाने का फैसला लिया था.

भारत ने पिछले साल राफेल मरीन वर्जन का भी किया था सौदा

पिछले वर्ष अप्रैल के महीने में ही भारत ने नौसेना के लिए फ्रांस के साथ राफेल के 26 मरीन वर्जन का सौदा भी किया था, जिसकी कीमत करीब 63 हजार करोड़ थी. इन राफेल (एम) विमानों को नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने के लिए खरीदा जाएगा. पहला राफेल मरीन एयरक्राफ्ट भी 2028 तक ही नौसेना को मिल पाएगा.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments