तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेशी के विरोध में तेलंगाना में बीआरएस (BRS) कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है. पूरे राज्य में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन का दौर देखने को मिला. हैदराबाद के मियापुर से लेकर भूपालपल्ली तक, बीआरएस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरकर ‘रेवंत रेड्डी डाउन डाउन’ के नारे लगाए.
मौके पर मौजूदगी के नाते देखा गया कि हैदराबाद के मियापुर स्थित अल्विन कॉलोनी चौराहे पर सैकड़ों की संख्या में बीआरएस समर्थक सड़क पर उतर आए. उन्होंने सीएम रेवंत रेड्डी के फोटो और पोस्टर लगाकर विरोध दर्ज कराया. माहौल इतना गर्म हो गया कि काफी देर तक यातायात बाधित रहा. वहीं, भूपालपल्ली जिले के कोठापल्ली गांव में स्थिति और भी भावुक हो गई. ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने सीएम रेवंत रेड्डी की प्रतिकृति को कफ़न में लपेटकर शव यात्रा (Mock Funeral) निकाली, जिसे देखकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया. पूर्व विधायक गंद्रा वेंकट रमणा रेड्डी के नेतृत्व में बीआरएस नेताओं ने भूपालपल्ली में बाइक रैली भी निकाली.
क्यों खड़ा हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद SIT जांच के नाम पर बीआरएस अध्यक्ष KCR को परेशान करने की कोशिश के रूप में सामने आया है. बीआरएस नेताओं का आरोप है कि फोन टैपिंग मामले की जांच का इस्तेमाल कांग्रेस सरकार राजनीतिक दुश्मनी निकालने के लिए कर रही है. गांवों में ‘शव यात्रा’ जैसे कदमों से साफ है कि पार्टी कार्यकर्ताओं में अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई को लेकर काफी चिढ़ है. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को एक नए और गर्म स्तर पर पहुंचा दिया है. एक तरफ जहां सरकार जांच को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे तानाशाही करार दे रहा है. अब सवाल यह उठता है कि क्या इस बढ़ते तनाव के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा? दोनों पक्षों के बीच यह खींचतान अभी और लंबी चल सकती है.



