Friday, February 13, 2026
spot_img
HomeBusiness'संविधान पर हमला और फासीवादी सोच...', हिमंत बिस्वा सरमा के मुसलमानों को...

‘संविधान पर हमला और फासीवादी सोच…’, हिमंत बिस्वा सरमा के मुसलमानों को लेकर दिए बयान पर भड़के मौलाना महमूद मदनी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयान पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान न केवल खुले तौर पर हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले हैं, बल्कि वे भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे पर सीधा हमला भी हैं.

मौलाना मदनी ने कहा कि किसी विशेष समुदाय को भयभीत करना, उसके मताधिकार को छीनने की धमकी देना और उसके खिलाफ आर्थिक शोषण को प्रोत्साहित करना, खुले फासीवाद और सामूहिक दंड की मानसिकता को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सोच किसी भी सभ्य, लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में पूरी तरह अस्वीकार्य है.

भड़काऊ बयानबाजी पर तत्काल FIR दर्ज हो: मदनी

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बयानों को मात्र राजनीतिक बयानबाजी या चुनावी रणनीति मानकर नजरअंदाज़ करना, लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से समझौता करने के समान होगा. मौलाना मदनी ने मांग की कि इस तरह के भड़काऊ और विभाजनकारी बयानों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और यह स्पष्ट संदेश दिया जाए कि भारत में न तो कोई व्यक्ति कानून से ऊपर है और न ही कोई पद नफरत फैलाने का अधिकार प्रदान करता है.

ये राज्य की शक्ति का दुरुपयोग: मौलाना मदनी

मौलाना मदनी ने कहा कि अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री खुद यह स्वीकार करे कि वह प्रशासनिक और सरकारी तंत्र को किसी समुदाय के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. लोगों को झूठी शिकायतें दर्ज कराने, निराधार आपत्तियां उठाने और सुनियोजित रूप से उत्पीड़न के लिए उकसा रहा है तो यह राज्य शक्ति का घोर दुरुपयोग है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान एक समुदाय के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा को वैध ठहराने का प्रयास हैं, जिससे पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं.

लोकतांत्रिक सेहत से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा: मदनी

उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस मामले को किसी एक राज्य तक सीमित विषय नहीं मानती, बल्कि इसे देश की लोकतांत्रिक सेहत से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा मानती है. अगर आज एक राज्य में किसी समुदाय को निशाना बनाने की छूट दी जाती है तो कल यही रवैया किसी अन्य समुदाय के खिलाफ भी अपनाया जा सकता है.

मौलाना मदनी ने सभी संवैधानिक संस्थाओं, विशेष रूप से निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज से अपील की कि वे मूक दर्शक बने रहने के बजाय अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करें, ताकि नफरत, विभाजन और भय की राजनीति करने वालों को समय रहते रोका जा सके और लोकतंत्र की रक्षा सुनिश्चित हो सके.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments