Wednesday, February 11, 2026
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‘हजारों कुत्तों, बंदरों की हत्या’ पर दिल्ली में तेलंगाना भवन के सामने हंगामा, कार्यकर्ताओं ने सरकार को दी चेतावनी

तेलंगाना में बेजुबान जानवरों पर कथित अत्याचारों का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजधानी में गूंज रहा है. दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन के सामने मंगलवार को जंतु अधिकार कार्यकर्ताओं (Animal Rights Activists) का एक बड़ा समूह उग्र हो गया. उनका आक्रोश राज्य में हजारों आवारा कुत्तों और सौ से अधिक बंदरों की कथित नृशंस हत्याओं को लेकर था. तख्तियां लिए और जोरदार नारे लगाते हुए ये कार्यकर्ता तेलंगाना सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और तुरंत इस ‘हत्याकांड’ को रोकने की मांग की.

‘मानव-जंतु संघर्ष के नाम पर जानवरों को खत्म कर रहा प्रशासन’

विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण था. कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन मानव-जंतु संघर्ष को कम करने के नाम पर जानवरों को खत्म करने की नीति अपना रहा है, जो न केवल अमानवीय है बल्कि कानून की भी अवहेलना है. सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के स्पष्ट आदेश हैं कि आवारा जानवरों को मारना (कलिंग) अवैध है. इस संदर्भ में, प्रदर्शनकारियों ने सरकार को याद दिलाया कि समस्या का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि विज्ञान में छिपा है.

पशु जन्म नियंत्रण नीतियों का सख्ती से करें पालन

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हत्या कोई समाधान नहीं है. उनकी मांग है कि सरकार ‘पशु जन्म नियंत्रण’ (ABC) नीतियों का सख्ती से पालन करे. ‘स्टेरिलाइजेशन’ (जन्म नियंत्रण), ‘वैक्सीनेशन’ (टीकाकरण) और ‘हैबिटेट प्रोटेक्शन ‘ (निवास स्थान सुरक्षा) को ही इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान बताया गया. कार्यकर्ताओं का कहना था कि मारकर आबादी कम करने का तरीका अस्थायी और क्रूर है, जबकि जन्म नियंत्रण से दीर्घकालिक रूप से आवारा जानवरों की संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

अब सवाल यह है कि क्या तेलंगाना सरकार इन गंभीर आरोपों की गंभीरता को समझेगी और कानून के दायरे में रहते हुए मानवीय और वैज्ञानिक समाधान अपनाएगी? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह विवाद और भी बड़ा हो सकता है और प्रशासन को देशभर में आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है.

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