एबीपी नेटवर्क की तरफ से आयोजित इंडिया 2047 यूथ कॉन्क्लेव में भारतीय उद्यमिता और देसी ब्रांड्स की बढ़ती ताकत पर एक मजबूत संदेश सामने आया. इस मंच पर जयपुर वॉच कंपनी के संस्थापक गौरव मेहता ने अपने स्टार्टअप के सफर की कहानी साझा करते हुए बताया कि कैसे सीमित संसाधनों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद एक भारतीय ब्रांड वैश्विक पहचान की ओर बढ़ सकता है.
गौरव मेहता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से उनकी कंपनी की घड़ी पहनना उनके लिए एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला पल था. बता दें कि प्रधानमंत्री पिछले 8 महीने से जयपुर वॉच कंपनी की घड़ी पहन रहे हैं, जिसमें शेर बना हुआ है. इस पर गौरव मेहता ने साफ तौर पर कहा, ‘यह किसी प्रचार, उपहार या अनुरोध का परिणाम नहीं था. पीएम मोदी ने अपनी व्यक्तिगत पसंद से उनकी घड़ी पहनी, जिसने उनके ब्रांड को आत्मविश्वास और नई पहचान दी.’
13 साल का संघर्ष और सीख से भरा सफर
गौरव मेहता ने कहा कि पिछले 13 वर्षों का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन हर पड़ाव ने कुछ नया सिखाया. उस दौर में जब भारतीय बाजार में विदेशी घड़ियों का दबदबा था, एक अनजान देसी ब्रांड को स्थापित करना बड़ी चुनौती थी. बचपन से घड़ियों के प्रति रुचि ने ही उन्हें इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए प्रेरित किया.
बिना बड़े प्लान के शुरू हुआ स्टार्टअप
जयपुर वॉच कंपनी की शुरुआत को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पहला कलेक्शन साल 2013 में और दूसरा 2015 में लॉन्च हुआ. उस समय उनके पास न तो बड़ा निवेश था और न ही कोई बड़ा बिजनेस प्लान. उन्होंने कहा कि जब पहली घड़ी तैयार हुई तो सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि इसे ग्राहकों तक कैसे पहुंचाया जाए. सीमित बजट और संसाधनों के बावजूद उन्होंने धैर्य के साथ ब्रांड को आगे बढ़ाया.
भारतीय संस्कृति ही सबसे बड़ी ताकत
राम मंदिर और भारतीय विरासत से जुड़ी थीम वाली घड़ियों पर बात करते हुए गौरव मेहता ने कहा कि विदेशी ब्रांड्स जैसी विशाल मार्केटिंग क्षमता उनके पास नहीं है, लेकिन भारतीय संस्कृति से जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने माना कि लंबे समय तक भारतीय उपभोक्ताओं में विदेशी ब्रांड्स को बेहतर मानने की मानसिकता रही है, लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है. उन्होंने बताया कि राम मंदिर एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने हाथ में जयपुर वॉच कंपनी की घड़ी पहनी हुई थी. इसके अलावा कई सारे अन्य नेता हमारी कंपनी की घड़ी पहनते हैं.
युवाओं में लौट रहा है देसी और पारंपरिक रुझान
गौरव मेहता के अनुसार, आज का युवा वर्ग फिर से भारतीय जड़ों की ओर लौट रहा है. स्मार्टवॉच के दौर के बावजूद पारंपरिक और क्लासिक घड़ियों की मांग में दोबारा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय वॉच मार्केट में सकारात्मक ग्रोथ दिखाई दे रही है, जो देसी ब्रांड्स के लिए बड़े अवसर लेकर आ रही है.



