ओडिशा के बरगढ़ जिले के पाईकमाल थाना क्षेत्र में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. बरगढ़ के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायालय (POCSO कोर्ट) ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को मामले में अभियुक्त प्रशांत बाग को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला पुलिस की त्वरित कार्रवाई और लगातार निगरानी का अहम उदाहरण माना जा रहा है.
यह घटना पिछले साल 15 नवंबर 2024 को घटी थी. अभियुक्त पीड़िता को मछली पकड़ने के बहाने घर से बाहर ले गया था. बाद में नाबालिग का शव जंगल से नग्न अवस्था में बरामद हुआ था. शव के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और गले में बेल्ट बंधी हुई पाई गई थी. शुरुआती जांच में ही मामला दुष्कर्म और हत्या का सामने आया था.
ओडिशा पुलिस की मामले में की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बरगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रह्लाद सहाय मीणा ने जांच की शुरुआत से ही पूरे प्रकरण की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की. FIR दर्ज होने के तुरंत बाद जांच की प्रगति की रोजाना समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए. महज दो दिनों के भीतर सुपरविजन नोट जारी कर जांच को तेज किया गया, जिससे सबूत जुटाने और कानूनी प्रक्रिया में कोई देरी नहीं हुई.
पुलिस ने महज 20 दिनों में पूरी की थी जांच
पदमपुर थाना की IIC ममता नायक की ओर से की गई विवेचना के दौरान गवाहों के बयान, घटनास्थल से सबूत, अभियुक्त की गिरफ्तारी और फॉरेंसिक जांच पर विशेष ध्यान दिया गया. 3 दिसंबर, 2024 को SFSL, भुवनेश्वर से प्राप्त फॉरेंसिक रिपोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मजबूत आधार दिया. पुलिस ने FIR से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक की पूरी जांच महज 20 दिनों में पूरी कर ली.
मामले का ट्रायल विशेष लोक अभियोजक द्युतिश आचार्य की ओर से संचालित किया गया. सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 37 गवाहों की गवाही दर्ज की गई, 55 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए और 27 भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए. अभियोजन और पुलिस के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखा गया, जिससे सभी सबूत विधिसम्मत तरीके से अदालत के सामने रखे जा सके.
कोर्ट ने पीड़िता के परिजनों को 15 लाख देने का दिया आदेश
अंत में पोक्सो कोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को अभियुक्त को BNS की धारा 140(1), 103(1), 65(2), 66 और POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया. कोर्ट ने अभियुक्त को मौत की सजा और आजीवन कारावास की सजा के साथ पीड़िता के परिजनों को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया.
यह मामला समयबद्ध जांच, मजबूत अभियोजन और सतत पुलिस निगरानी के जरिए त्वरित न्याय का उदाहरण माना जा रहा है. संवेदनशील अपराधों में प्रभावी पुलिसिंग और न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.
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