Sunday, September 27, 2026
spot_img
HomeTechnologyCoal vs Nuclear: कौन-सा पावर प्लांट बनाता है ज्यादा बिजली?

Coal vs Nuclear: कौन-सा पावर प्लांट बनाता है ज्यादा बिजली?

Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • कोयले का उपयोग सालाना, न्यूक्लियर ईंधन डेढ़-दो साल बदलें.

बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच पावर प्लांट की क्षमता और उसकी एफिशिएंसी दोनों पर चर्चा तेज रहती है. कोयला और न्यूक्लियर पावर, दोनों लंबे समय से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है.

कोयले से बिजली बनाने में ईंधन को जलाकर गर्मी पैदा की जाती है, जबकि न्यूक्लियर प्लांट में परमाणु ईंधन से निकलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि Coal और Nuclear में आखिर कौन ज्यादा बिजली पैदा करता है. 

कोयले से बिजली बनाने में कितनी ऊर्जा मिलती है?

कोयला आधारित पावर प्लांट में कोयले को जलाकर गर्मी पैदा की जाती है. इस गर्मी से पानी भाप में बदलता है और भाप टरबाइन को घुमाती है. इसके बाद टर्बाइन से जुड़ा अल्टरनेटर बिजली पैदा करता है. इस पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में निकल जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य कोयला पावर प्लांट की एफिशिएंसी करीब 32 से 33 प्रतिशत होती है. कोयले में मौजूद ऊर्जा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही बिजली में बदला जा पाता है, जबकि बाकी ऊर्जा conversion process में खो जाती है. 

न्यूक्लियर प्लांट कैसे बनाता है ज्यादा बिजली?

न्यूक्लियर पावर प्लांट में enriched uranium-235 जैसे परमाणु ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. यहां परमाणु प्रक्रिया से निकलने वाली गर्मी का यूज भाप बनाने में होता है और यही भाप टरबाइन को चलाकर बिजली पैदा करती है. कई रिपोर्ट्स में न्यूक्लियर पावर को कोयले की तुलना में काफी अधिक एफिशियंट बताया गया है. इसमें fissile material से बिजली बनाने का कैपिसिटी फैक्टर 92 प्रतिशत तक बताया गया है. इसी वजह से समान मात्रा के ईंधन से न्यूक्लियर पावर ज्यादा ऊर्जा हासिल कर सकता है. 

यह भी पढ़ें –Gemini का नया कमाल! अब Google से बनाएं हाई-क्वालिटी वीडियो, ऐसे करें इस्तेमाल

कौन-सा पावर प्लांट ज्यादा बिजली बनाता है?

बिजली बनाने की क्षमता और एफिशिएंसी के मुताबिक, न्यूक्लियर पावर प्लांट ज्यादा बिजली पैदा कर सकता है. आंकड़ों के अनुसार, एक सामान्य न्यूक्लियर प्लांट करीब 1 गीगावॉट बिजली पैदा करता है, जबकि एक औसत कोयला पावर प्लांट की क्षमता लगभग 380 मेगावॉट होती है. 

न्यूक्लियर प्लांट में कब बदलता है ईंधन?

कोयला और न्यूक्लियर पावर प्लांट में ईंधन की जरूरत के मामले में काफी अंतर है. आंकड़ों के मुताबिक, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट हर साल करीब 1.1 अरब टन कोयला इस्तेमाल करते हैं. हालांकि यह केवल अमेरिका के संदर्भ में है. वहीं न्यूक्लियर प्लांट को बार-बार ईंधन डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. न्यूक्लियर पावर प्लांट में आमतौर पर करीब 1.5 से 2 साल के अंतर पर ईंधन बदला या दोबारा भरा जाता है. जिससे दोनों तरह के पावर प्लांट में ईंधन की खपत और उसे इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग होता है. 

यह भी पढ़ें –क्या AI आपके पुराने Chat से आपकी Personality पहचान सकता है? ऐसे करें आसान Experiment

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments