आज के समय में इंटरनेट ब्राउजर सिर्फ वेबसाइट खोलने का जरिया नहीं रह गया है. ब्राउजर में हमारे पासवर्ड, बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट और पर्सनल डेटा तक मौजूद रहता है. ऐसे में Google Chrome और Microsoft Edge में से कौन ज्यादा सुरक्षित है, यह सवाल काफी अहम हो जाता है. दोनों ब्राउजर सुरक्षा के लिए कई एडवांस फीचर्स देते हैं लेकिन इनके काम करने का तरीका और एक्सट्रा सुरक्षा ऑप्शन अलग-अलग हैं.
Chrome में मिलते हैं ये सिक्योरिटी फीचर्स
आपको बता दें कि Google Chrome में यूजर्स को Safe Browsing जैसे फीचर मिलते हैं जो खतरनाक वेबसाइट, डाउनलोड और फिशिंग लिंक से बचाने में मदद करते हैं. Chrome किसी संदिग्ध वेबसाइट पर जाने से पहले चेतावनी दिखाता है जिससे यूजर गलती से किसी फ्रॉड पेज पर अपनी जानकारी दर्ज करने से बच सकता है.
इसके अलावा Chrome में पासवर्ड मैनेजर, साइट परमिशन कंट्रोल और सिक्योरिटी चेकअप जैसे ऑप्शन भी मौजूद रहते हैं. Chrome का सिक्योरिटी सिस्टम लगातार अपडेट होता रहता है जिससे नए साइबर खतरों के खिलाफ सुरक्षा बेहतर करने की कोशिश की जाती है.
Edge भी सुरक्षा में पीछे नहीं
Microsoft Edge में भी कई मजबूत सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं. इसमें Microsoft Defender SmartScreen खतरनाक वेबसाइट और डाउनलोड के खिलाफ चेतावनी देने में मदद करता है. यह फीचर खास तौर पर फिशिंग और खतरनाक फाइलों से बचाव के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है.
Edge में Tracking Prevention का ऑप्शन भी मिल जाता है. इसके जरिए यूजर यह कंट्रोल कर सकता है कि वेबसाइट्स उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी को किस हद तक ट्रैक कर पाएं. Microsoft Edge में अलग-अलग लेवल की Tracking Prevention सेटिंग्स मौजूद हैं जिन्हें जरूरत के हिसाब से बदला भी जा सकता है.
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असली फर्क कहां दिखाई देता है?
Chrome और Edge दोनों ही एडवांस सुरक्षा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक ब्राउजर हर कंडिशन में सुरक्षित है और दूसरा असुरक्षित. सुरक्षा काफी हद तक ब्राउजर को अपडेट रखने, संदिग्ध वेबसाइटों से बचने और सही प्राइवेसी सेटिंग्स इस्तेमाल करने पर भी निर्भर करती है.
दोनों ब्राउजर में फिशिंग और मालवेयर से सुरक्षा के लिए चेतावनी सिस्टम मौजूद हैं. हालांकि, Edge का Microsoft के सुरक्षा इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेशन और Chrome का Google के Safe Browsing सिस्टम के साथ जुड़ाव इनके सेफ्टी एक्सपीरिएंस में अंतर जरूर पैदा करता है.
कौन सा ब्राउजर चुनना चाहिए?
अगर आपकी प्राथमिकता सुरक्षा है तो केवल Chrome या Edge के नाम के आधार पर फैसला करने के बजाय उनके सिक्योरिटी और प्राइवेसी फीचर्स को देखें. दोनों में मजबूत सेफ्टी फीचर्स उपलब्ध हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि ब्राउजर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर रखें और अनजान एक्सटेंशन, संदिग्ध डाउनलोड और फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें.
साथ ही, ब्राउजर में सेव पासवर्ड और वेबसाइट परमिशन की समय-समय पर समीक्षा करना भी जरूरी है. याद रखें, सबसे सुरक्षित ब्राउजर भी तब खतरे में पड़ सकता है जब यूजर किसी फर्जी लिंक पर क्लिक करके अपनी संवेदनशील जानकारी खुद शेयर कर दे.
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