Tuesday, April 14, 2026
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‘वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के रीति-रिवाजों में नहीं होगा कोई बदलाव’, सुप्रीम कोर्ट ने कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 अप्रैल, 2026) को साफ कर दिया कि वह वृंदावन के मशहूर बांके बिहारी मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों के संबंध में मौजूदा व्यवस्था में कोई ढांचागत बदलाव नहीं करेगा. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान और वकील तन्वी दुबे की दलीलों पर ध्यान दिया और निर्देश दिया कि मामले को दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए ताकि पक्षों को हाल में दायर की गई स्थिति रिपोर्ट पर जवाब देने का मौका मिल सके.

सुप्रीम कोर्ट ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंध समिति और सेवायतों (पुजारियों) की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ताओं ने अदालत की ओर से बनाई गई उच्चाधिकार प्राप्त समिति के हाल के प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी है, जिनमें कथित रूप से सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में दखल दिया गया है.

इससे पहले, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी थी और मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अशोक कुमार की अगुवाई में 12 सदस्यों वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई थी.

एडवोकेट श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि उन्हें रविवार देर शाम स्थिति रिपोर्ट दी गई और उन्हें जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाए. मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई टालते हुए कहा, ‘हम मौजूदा व्यवस्था में कोई ढांचागत बदलाव करने के लिए तैयार नहीं हैं.’

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति अदालत के निर्देशों के अनुसार चलना चाहती है और इस मामले में कोई विपरीत रुख नहीं अपनाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर, 2025 को याचिका पर नोटिस जारी किए थे और स्थिति रिपोर्ट रविवार को दायर की गई थी. बेंच ने एक आवेदन पर नोटिस भी जारी किया जिसमें कुछ तथ्यात्मक और दूसरे आधार उठाए गए हैं, जिनमें बदलाव या स्पष्टीकरण की जरूरत है.

याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी उच्च शक्तियों का मतलब कैसे निकाला है, जिसने मंदिर के जरूरी धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़े कुछ आदेश जारी किए हैं. इसमें दर्शन के समय में बदलाव, देहरी पूजा की रस्म बंद करना, सेवायत गोस्वामी पर फूल बंगला सेवा के लिए बहुत ज्यादा शुल्क लगाना आदि शामिल हैं.

 

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